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कोटा बीईओ कार्यालय में 29.62 लाख का वेतन घोटाला: चपरासी बना 'मास्टरमाइंड', अफसरों की आईडी से खुद ही पास किए बिल
बिलासपुर | शिक्षा विभाग के कोटा ब्लॉक में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय ऑडिट और निगरानी तंत्र की धज्जियां उड़ा दी हैं। यहाँ एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (भृत्य) ने अधिकारियों की मिलीभगत और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर महज 15 महीनों में शासन के खजाने से 29 लाख 62 हजार 322 रुपए का गबन कर लिया। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी चपरासी ही विभाग में 'डीडीओ' (आहरण एवं संवितरण अधिकारी) की भूमिका निभा रहा था और खुद ही अपना वेतन बढ़ाकर पास कर रहा था।
रैंडम चेकिंग में खुला राज, चपरासी के खाते में लाखों का ट्रांजैक्शन....
संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन द्वारा डेटा के रैंडम परीक्षण के दौरान यह विसंगति पकड़ी गई। जांच में पाया गया कि कोटा बीईओ कार्यालय में पदस्थ भृत्य देवेन्द्र कुमार पालके के वेतन में अचानक असामान्य वृद्धि हुई है। जब वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने इसकी गहराई से जांच की, तो परत दर परत फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पुलिस ने अब इस मामले में तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों समेत अन्य के खिलाफ वित्तीय अनियमितता और दस्तावेजों में हेराफेरी की धाराओं के तहत जुर्म दर्ज किया है।
खेल: खुद ही मेकर और खुद ही चेकर
जांच रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी चपरासी पिछले 10-15 वर्षों से वेतन बिल बनाने का काम देख रहा था। अफसरों ने उसे अपनी चेकर आईडी और डिजिटल सिग्नेचर तक सौंप रखे थे।देवेन्द्र पालके अपनी 'मेकर आईडी' से बिल बनाता और अधिकारियों की आईडी का उपयोग कर उसे खुद ही सत्यापित कर कोषालय भेज देता था। पकड़े जाने के डर से वह कैश बुक और बिल रजिस्टर में कम राशि दर्ज करता था, जबकि बैंक खाते में मोटी रकम ट्रांसफर कराता था। यहाँ तक कि वह अपना फॉर्म 16 भी फर्जी तरीके से खुद तैयार कर लेता था।
वसूली में लगेंगे 10 साल, अफसरों पर गिरी गाज
इस पूरे गबन में अब तक केवल 1.45 लाख रुपए की ही रिकवरी हो पाई है। आरोपी के वेतन से हर महीने 24 हजार रुपए काटे जा रहे हैं, जिसे पूरा वसूलने में सरकार को लगभग 10 साल का समय लगेगा। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी ने तत्कालीन बीईओ और वर्तमान डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) विजय टांडे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की है। वर्तमान बीईओ नरेंद्र प्रसाद मिश्रा और लेखा प्रभारी नवल सिंह पैकरा भी जांच के दायरे में हैं।
डीईओ विजय टांडे और विवादों का पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब बिलासपुर शिक्षा विभाग के आला अधिकारी विवादों के घेरे में आए हों। इस ताजा घोटाले ने डीईओ विजय टांडे की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
धूल खाती...फाइलों से निकला भ्रष्टाचार का जिन्न'
गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व एक महिला ने डीईओ विजय टांडे पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोला था। उस दौरान यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था कि विभाग में नियुक्तियों और एरियर भुगतान के बदले लेन-देन का खेल चल रहा है। अब कोटा के इस 30 लाख के 'चपरासी कांड' ने यह साफ कर दिया है कि साहब की नाक के नीचे सरकारी खजाने की लूट मची थी और वे हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। चर्चा है कि क्या यह महज लापरवाही है या फिर मलाई का हिस्सा ऊपर तक जा रहा था?
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
