प्रशासन की नाक के नीचे रातभर रेत चोरी, मदकू घाट में माफियाओं अधिकारियों को दे रहे की खुली चुनौती
26 मई की कार्रवाई नाकाम, ग्रामीणों में आक्रोश, खनिज विभाग की चुप्पी संदेह के घेरे में
बिलासपुर । सरगांव तहसील के मदकू घाट सहित सल्फा और बासीन गांवों में शिवनाथ नदी से अवैध रेत उत्खनन का सिलसिला बदस्तूर जारी है। 26 मई को जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के बावजूद रेत माफिया पूरी बेशर्मी से रातभर रेत निकालते नजर आए। प्रतिदिन 15 से 20 ट्रैक्टरों के जरिए रेत की खुदाई और परिवहन खुलेआम हो रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, 26 से 29 मई तक प्रतिदिन रात 8 बजे के बाद से रेत माफिया सक्रिय हो जाते हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली और हाईवा के माध्यम से रेत निकाल कर सरकारी जमीनों पर डंप की जा रही है। माफिया इतने बेखौफ हैं कि पत्रकारों और ग्रामीणों को धमकाने से भी नहीं चूकते। शराब के नशे में धुत गुंडों द्वारा मौके पर पहुंचने वाले लोगों को धमकाया गया। आरोप है कि माफिया खुलेआम कहते हैं शासन-प्रशासन हमारी जेब में है।"
प्रशासन की चुप्पी और खनिज विभाग की निष्क्रियता को लेकर लोगों में आक्रोश है। मनीष साहू, सभापति, खनिज विभाग (पथरिया जनपद) ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्षेत्र में 10,000 से अधिक ट्रिप रेत अवैध रूप से डंप है, लेकिन खनिज विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
वहीं, जिला कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने इस मुद्दे पर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा से जुड़े रसूखदार लोग प्रशासनिक संरक्षण में रेत माफियागिरी कर रहे हैं। प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ दिखावा है, असल रेत चोरी पर कोई असर नहीं पड़ा।
खनिज अधिकारी ज्योति मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि वर्षों से एक ही जिले में पदस्थ होने के चलते उनकी रेत माफियाओं से साठगांठ है।
जनता को अब जिले के नवपदस्थ कलेक्टर कुंदन कुमार से उम्मीद है कि वे निष्पक्ष जांच कर इस संगठित अपराध पर लगाम लगाएंगे।
