36 घंटे हिरासत के बाद शरीर पर चोट के निशान! परिवार का दावा- ‘10-12 पुलिसकर्मियों ने लाठियों से पीटा, हत्या कबूलने का दबाव बनाया’, देखे वीडियो

36 घंटे हिरासत के बाद शरीर पर चोट के निशान! परिवार का दावा- ‘10-12 पुलिसकर्मियों ने लाठियों से पीटा, हत्या कबूलने का दबाव बनाया’, देखे वीडियो

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में हत्या की जांच के दौरान पुलिस हिरासत में कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घुमका पुलिस पर दो युवकों को करीब 36 घंटे तक हिरासत में रखकर पीटने और हत्या का जुर्म कबूल करने के लिए दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का दावा है कि युवकों के कूल्हे और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान हैं। परिवार ने इन चोटों के वीडियो बनाकर पुलिस अधीक्षक को सौंपे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, पुलिस ने युवकों को हत्या मामले का मुख्य संदेही बताया है और हिरासत में मारपीट के आरोपों की अलग से जांच किए जाने की बात कही है।

एक साल पुराने हत्याकांड की जांच में सामने आया विवाद
पूरा मामला करीब एक साल पुराने हत्याकांड से जुड़ा है। 11 नवंबर 2025 को बरबसपुर गांव में 70 वर्षीय बिहासीन साहू का अधजला शव पैराग्रहा में मिला था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या के बाद शव जलाए जाने की बात सामने आने के बाद घुमका पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी। जांच आगे बढ़ने पर मृतका के बेटे नेतराम साहू और उनके दोनों बेटों पवन साहू और प्रदीप साहू को पूछताछ के लिए बुलाया गया।परिवार वालों ने SP ऑफिस पहुंचकर मामले की शिकायत की।

परिवार का आरोप- 10 से 12 पुलिसकर्मियों ने की पिटाई
नेतराम साहू ने एसपी को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उनके दोनों बेटों पवन और प्रदीप को पुलिसकर्मियों ने लाठियों से पीटा। परिवार का दावा है कि करीब 10 से 12 पुलिसकर्मी इस कथित मारपीट में शामिल थे। आरोप यह भी है कि युवकों पर बुजुर्ग महिला की हत्या का जुर्म कबूल करने के लिए दबाव बनाया गया। परिजनों के मुताबिक, मारपीट के बाद दोनों युवकों के शरीर पर सूजन और लाल निशान पड़ गए।

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18 अगस्त से 20 अगस्त तक थाने में रखने का दावा 
परिवार के अनुसार, तीनों को 18 अगस्त की सुबह से 20 अगस्त की शाम तक पुलिस पूछताछ के लिए अपने पास रखे हुए थी। परिजनों का आरोप है कि इस दौरान उन्हें न तो समय पर परिजनों या वकील से मिलने दिया गया और न ही कथित मारपीट के बाद तत्काल उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। हालांकि, पुलिस की ओर से हिरासत की पूरी अवधि और आरोपों को लेकर विस्तृत आधिकारिक पक्ष जांच के बाद सामने आने की बात कही गई है।पीड़ितों के कूल्हे में सूजन और लाल निशान पड़ गए।

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गांव के बाहर छोड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती
परिवार का आरोप है कि करीब 36 घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस तीनों को 20 अगस्त की शाम बरबसपुर के प्रवेश द्वार के पास छोड़कर चली गई। इसके बाद पवन और प्रदीप की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका उपचार कराया गया। इसी दौरान परिवार के लोग ग्रामीणों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की शिकायत की।

परिवार बोला- हत्या के समय दूसरे गांव में थे
एसपी को दी गई शिकायत में नेतराम साहू ने दावा किया कि जिस समय बुजुर्ग महिला की हत्या हुई, उस समय वह अपने दोनों बेटों के साथ दूसरे गांव में लड़की देखने गए थे। परिवार का आरोप है कि पुलिस वास्तविक आरोपियों तक पहुंचने के बजाय उन्हें ही मामले में फंसाने का प्रयास कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पुलिस का पक्ष- तीनों मुख्य संदेही, पूछताछ जरूरी थी
मामले में एडिशनल एसपी कीर्तन राठौर के मुताबिक, तीनों मृतका के रिश्तेदार हैं और हत्या के मामले में मुख्य संदेहियों में शामिल हैं। इसी वजह से उनसे पूछताछ की जा रही थी। उन्होंने कहा कि हिरासत के दौरान मारपीट और दुर्व्यवहार के लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया गया है और इस पहलू की अलग से निष्पक्ष जांच की जा रही है।परिवार वालों ने चोट के निशान का वीडियो बनाकर एसपी को सौंपा।

अब दो जांचों पर टिकी नजर
इस मामले में अब जांच दो अलग-अलग दिशाओं में आगे बढ़ रही है। पहली जांच 70 वर्षीय बिहासीन साहू की हत्या और शव जलाने की घटना को लेकर है, जबकि दूसरी जांच पुलिस हिरासत में कथित मारपीट के आरोपों पर केंद्रित है। फिलहाल, युवकों के चोटिल होने के दावे, हिरासत की परिस्थितियों और पुलिस पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में अब सवाल यही है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है।

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