अमेरिकी प्रतिबंधों को चीन की खुली चुनौती: ईरानी तेल खरीद पर अड़ा ड्रैगन, 5 रिफाइनरियों को दिया ‘न मानो आदेश’, बढ़ा वैश्विक टकराव

अमेरिकी प्रतिबंधों को चीन की खुली चुनौती: ईरानी तेल खरीद पर अड़ा ड्रैगन, 5 रिफाइनरियों को दिया ‘न मानो आदेश’, बढ़ा वैश्विक टकराव

नई दिल्ली। ईरानी तेल को लेकर वैश्विक ऊर्जा राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, जब China ने United States द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को खुली चुनौती दे दी। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने पांच स्वतंत्र रिफाइनरियों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को “अवैध और एकतरफा” बताते हुए उन्हें मानने से इनकार कर दिया है। इस कदम से दोनों महाशक्तियों के बीच पहले से चल रहा व्यापारिक तनाव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

चीन ने स्पष्ट किया है कि उसकी कंपनियां, जिनमें Hengli Petrochemical सहित अन्य “टीपॉट रिफाइनरियां” शामिल हैं, ईरान से तेल खरीद जारी रखेंगी। सरकार ने एक आधिकारिक निषेध आदेश (Blocking Order) जारी कर कहा है कि ये कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन नहीं करेंगी और उन्हें किसी भी विदेशी दबाव से बचाया जाएगा। चीन का तर्क है कि ऐसे प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब U.S. Department of the Treasury ने 24 अप्रैल को इन रिफाइनरियों को अपनी वित्तीय प्रणाली से बाहर करने की घोषणा की। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए ईरान को कच्चे तेल के निर्यात से भारी आर्थिक लाभ मिल रहा है, जिसका उपयोग उसकी सैन्य गतिविधियों में हो सकता है। दूसरी ओर, Iran लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद वैकल्पिक बाजारों के जरिए अपने तेल निर्यात को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह रुख वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है। एक तरफ जहां यह कदम ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से चीन की रणनीति को मजबूत करता है, वहीं दूसरी ओर यह अमेरिका-चीन संबंधों में नए टकराव की भूमिका भी तैयार कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या यह विवाद वैश्विक व्यापार और तेल कीमतों पर व्यापक प्रभाव डालता है।

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