राजधानी की बहुमंजिला इमारतों में मौत का फंदा बनीं लिफ्ट: ACS ऋचा शर्मा के बाद IAS अफसर की पत्नी और कांग्रेस प्रवक्ता फंसे, मैनेजमेंट मस्त-सिस्टम पस्त

राजधानी की बहुमंजिला इमारतों में मौत का फंदा बनीं लिफ्ट: ACS ऋचा शर्मा के बाद IAS अफसर की पत्नी और कांग्रेस प्रवक्ता फंसे, मैनेजमेंट मस्त-सिस्टम पस्त

रायपुर. राजधानी की पॉश और बहुमंजिला कमर्शियल इमारतें इन दिनों जानलेवा साबित हो रही हैं। इन इमारतों में लगी करोड़ों की लिफ्ट अब 'सुविधा' कम और 'खौफ का डिब्बा' ज्यादा बन गई हैं। वीआईपी रोड स्थित करेंसी टॉवर में सीनियर आईएएस (ACS) ऋचा शर्मा के 20 मिनट तक लिफ्ट में कैद रहने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि गुरुवार को फाफाडीह के पिथालिया कॉम्प्लेक्स में भी ऐसा ही वाकया दोहराया गया। यहां वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सिद्धार्थ कोमल परदेशी की पत्नी गार्गी परदेशी करीब 15-20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रहीं। एक के बाद एक वीआईपी और आम लोगों की जान पर बन आने के बावजूद प्रशासनिक अमला और बिल्डिंग मैनेजमेंट गहरी नींद में सोया हुआ है।

 

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कल पिथालिया कॉम्प्लेक्स में क्या हुआ?

 

गुरुवार सुबह फाफाडीह स्थित पिथालिया कॉम्प्लेक्स में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब आईएएस सिद्धार्थ कोमल परदेशी की पत्नी गार्गी परदेशी अपने निजी काम से वहां पहुंचीं। लिफ्ट में सवार होते ही तकनीकी खराबी आई और वह बीच में ही अटक गई। अचानक दरवाजे लॉक होने और लिफ्ट रुकने से वे घबरा गईं। लगभग 15 से 20 मिनट तक वह अंदर फंसी रहीं। गनीमत रही कि उन्होंने शोर मचाया और मोबाइल नेटवर्क के जरिए सूचना दी जा सकी। जिसके बाद गार्ड्स और टेक्नीशियन ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।

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करेंसी टॉवर बना हादसों का हॉटस्पॉट

 

पिथालिया कॉम्प्लेक्स से पहले वीआईपी चौक का चर्चित करेंसी टॉवर लिफ्ट हादसों का मुख्य केंद्र बन चुका है। एक हफ्ते के भीतर यहां दो बड़े मामले सामने आए:

 

घटना 1 (ACS की बिगड़ी तबीयत) राज्य की असिस्टेंट चीफ सेक्रेटरी (ACS) ऋचा शर्मा करेंसी टॉवर की 7वीं मंजिल पर स्थित जिम जाने के लिए सुबह 6:30 बजे लिफ्ट में सवार हुईं और 20 मिनट तक फंसी रहीं। घुटन, अंधेरे और खराब वेंटिलेशन के कारण उनकी तबीयत तक बिगड़ गई। न इमरजेंसी अलार्म बजा और न ही अंदर मोबाइल नेटवर्क मिला।

 

 घटना 2 (कांग्रेस प्रवक्ता फंसे) एसीएस के मामले से मैनेजमेंट ने कोई सबक नहीं लिया। बुधवार को इसी टॉवर में प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नितिन भंसाली भी शिकार हो गए। वे सुबह 8:30 बजे जिम से बेसमेंट की ओर जा रहे थे, तभी लिफ्ट का सपोर्ट सिस्टम फेल हो गया। दरवाजा पीट-पीटकर उन्होंने गार्ड्स को बुलाया, तब जाकर उनकी जान बची।

 

आम आदमी की जान से खिलवाड़

अगर इन घटनाओं की कड़ियां जोड़कर देखें, तो यह महज तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक बड़े नेक्सस और घोर लापरवाही का नतीजा है:

 1. मेंटेनेंस के नाम पर जीरो: करेंसी टॉवर जैसे बड़े कॉम्प्लेक्स (जहां 850 दुकानें हैं) में 4 में से 2 लिफ्ट कबाड़ हो चुकी हैं। जो चल रही हैं, वे भी आए दिन अटकती हैं। नामचीन कंपनियों (जैसे जॉनसन) की लिफ्ट होने के बावजूद मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।

 

 2. इमरजेंसी सिस्टम फेल: नियमों के मुताबिक लिफ्ट में सीसीटीवी, पावर बैकअप, वर्किंग अलार्म, ऑपरेटर और वेंटिलेशन जरूरी है, लेकिन मौके पर सब नदारद है। सुरक्षा गार्ड्स को रेस्क्यू की कोई ट्रेनिंग नहीं है।

 

जिम्मेदार कौन? मुख्य विद्युत निरीक्षालय (नवा रायपुर), जो इन लिफ्टों की फिटनेस और इंस्टॉलेशन का सर्टिफिकेट बांटता है, वह जमीनी जांच करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। नगर निगम और फायर एंड इमरजेंसी विभाग भी आंखें मूंदे बैठे हैं।

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