रायपुर-बिलासपुर के प्राइवेट अस्पतालों का खेल: मरीजों से छिपा रहे उनके अधिकार, मांगने पर मिलता है आपको क्या करना है? का जवाब

रायपुर-बिलासपुर के प्राइवेट अस्पतालों का खेल: मरीजों से छिपा रहे उनके अधिकार, मांगने पर मिलता है आपको क्या करना है? का जवाब

रायपुर। अगर आप या आपका कोई अपना राजधानी रायपुर या न्यायधानी बिलासपुर के किसी प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहा है, तो यह खबर आपको जरूर पढ़नी चाहिए। क्या आपको पता है कि अस्पताल में मरीज के तौर पर आपके कुछ खास अधिकार होते हैं? शायद नहीं। और प्राइवेट अस्पताल भी ठीक यही चाहते हैं कि आपको ये अधिकार कभी पता न चलें।

मरीजों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और मनमानी वसूली को रोकने के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट ने सख्त नियम बनाए हैं। इसके तहत हर अस्पताल को 'पेशेंट राइट्स चार्ट' (मरीजों के अधिकारों की सूची) लगाना अनिवार्य है। लेकिन रायपुर और बिलासपुर के निजी अस्पतालों से यह चार्ट पूरी तरह से गायब है।

नियम ताक पर, दोनों शहरों में मनमानी चालू

रायपुर में 50 से ज्यादा और बिलासपुर में भी दर्जनों छोटे-बड़े प्राइवेट अस्पताल चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर में मरीजों के अधिकारों वाला चार्ट कहीं नजर नहीं आता। नियम यह है कि इस चार्ट को अस्पताल में ऐसी जगह लगाया जाए, जहां हर आने-जाने वाले की नजर पड़े। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि मरीज अपने हक जान सकें और अस्पताल उनसे मनमाना पैसा न वसूल सके। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

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सवाल पूछने पर कर्मचारियों की बदसलूकी

जब इस चार्ट के बारे में अस्पताल के कर्मचारियों से पूछा जाता है, तो उनका रवैया बेहद खराब होता है। वे सीधे कहते हैं, आपको क्या करना है? वहीं, कई डॉक्टरों का रटा-रटाया जवाब होता है कि उन्हें ऐसे किसी नियम की कोई जानकारी ही नहीं है। साफ है कि दोनों शहरों के अस्पताल जानबूझकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, ताकि मरीजों को अंधेरे में रखकर मोटा बिल बनाया जा सके।

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क्या हैं आपके प्रमुख अधिकार?

अगर आप किसी भी निजी अस्पताल में जा रहे हैं, तो अपने ये 5 अधिकार जरूर जान लें:

 1. इलाज और खर्च की जानकारी: अस्पताल पहुंचते ही जांच के बाद डॉक्टर को बताना होगा कि बीमारी क्या है, इलाज कैसे होगा और इसमें कुल कितना खर्च आएगा।

 2. रेट लिस्ट: अस्पताल में सभी तरह के इलाज, सुविधाओं और जांच का रेट चार्ट लगा होना चाहिए। यह अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषा में भी होना जरूरी है।

 3. पारदर्शी बिल: अस्पताल को कैश पेपर, जांच रिपोर्ट और हर खर्च का अलग-अलग (आयटमाइज्ड) बिल देना होगा। बिल में सब कुछ साफ-साफ लिखा होना चाहिए।

 4. बड़े इलाज से पहले पूरी सूचना: सर्जरी या कीमोथेरेपी जैसे किसी भी बड़े इलाज से पहले मरीज और परिजनों को उसकी पूरी जानकारी विस्तार से देनी होगी।

 5. अस्पताल बदलने की छूट: अगर मरीज या परिजन मौजूदा अस्पताल के इलाज से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे दूसरे अस्पताल में जा सकते हैं। ऐसे में अस्पताल को मरीज की सारी रिपोर्ट तुरंत सौंपनी होगी।

जिम्मेदारों की चुप्पी से बढ़ रहे हौसले

अस्पतालों की इस लूट के पीछे स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की अनदेखी एक बड़ा कारण है। नियम तो बना दिए गए हैं, लेकिन उनका पालन कोई नहीं कर रहा है , राजधानी और न्यायधानी जैसे बड़े शहरों में आम आदमी मजबूरी में इलाज कराने पहुंचता है और जानकारी न होने के कारण अपनी गाढ़ी कमाई लुटा बैठता है। 

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