रविवि में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी का मामला गरमाया, दिल्ली से कुलपति को नोटिस जारी

रविवि में फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी का मामला गरमाया, दिल्ली से कुलपति को नोटिस जारी

रायपुर। राजधानी के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी हथियाने के मामले में अब दिल्ली की बड़ी अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया में आई खबरों को आधार बनाकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस पूरे खेल पर संज्ञान लिया है। आयोग ने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सच्चिदानन्द शुक्ल को नोटिस थमाते हुए 15 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने साफ कहा है कि अगर समय पर जवाब नहीं मिला तो कुलपति को व्यक्तिगत रूप से दिल्ली तलब किया जा सकता है।

विश्वविद्यालय में पिछले काफी समय से यह चर्चा आम थी कि कई लोगों ने गलत तरीके से आरक्षण का लाभ लेकर सरकारी कुर्सी हासिल कर ली है। आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 338 क के तहत उन्हें इस तरह के मामलों की जांच करने का पूरा अधिकार है। इसी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए अब उन लोगों की कुंडली खंगाली जा रही है जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के दम पर सालों से विभाग को गुमराह किया है।

पिता की जगह पति की जाति पर बनवा लिया सर्टिफिकेट

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस पूरे घोटाले में सबसे चौंकाने वाला मामला यह सामने आया है कि कुछ महिला कर्मचारियों ने पिता की जाति के बजाय अपने पति की जाति के आधार पर प्रमाण पत्र बनवा लिया और उसी के दम पर नौकरी हासिल कर ली। नियम के मुताबिक जाति का निर्धारण पिता के वंश से होता है न कि विवाह के बाद पति की जाति से। इस खुलासे के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।

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सालों से जांच समिति की फाइलों में दबकर रह गई थी शिकायत

विश्वविद्यालय के भीतर 18 लोगों के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र होने की गंभीर शिकायतें दर्ज हैं। हैरानी की बात यह है कि इन मामलों की जांच के लिए वेरिफिकेशन कमेटी तो बनाई गई लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी जांच की रिपोर्ट आज तक पूरी नहीं हो पाई। दबी जुबान में लोग कह रहे हैं कि रसूखदारों को बचाने के लिए जांच को जानबूझकर लटकाया गया। अब आयोग की सख्ती के बाद उन फाइलों की धूल झाड़ी जा रही है।

कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे हैं सवाल।

कुलपति डॉ सच्चिदानन्द शुक्ल ने बताया कि आयोग का नोटिस प्राप्त हुआ है और इस मामले में जो भी तथ्य हैं उन्हें संकलित किया जा रहा है। निर्धारित समय के भीतर आयोग को पूरी जानकारी भेज दी जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन नियमों के तहत जांच में पूरा सहयोग करेगा।

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