सीजी पीएससी की सफाई: न्यूज और स्पेशरानी नाम से ही भरा गया था आवेदन; पुलिस भर्ती के नतीजों पर राजनीतिक घमासान
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजी पीएससी) द्वारा जारी पुलिस भर्ती प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम चर्चा का विषय बन गए हैं। सूबेदार, उप निरीक्षक (एसआई) और प्लाटून कमांडर के पदों पर चयन के लिए जारी सूची में न्यूज और स्पेशरानी जैसे नाम सामने आने के बाद विवाद की स्थिति बनी है। सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद लोक सेवा आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए परीक्षार्थियों की जानकारी सार्वजनिक की है।
आयोग ने अपने आधिकारिक खंडन में कहा है कि परीक्षा परिणाम में उम्मीदवारों के वही नाम प्रदर्शित हुए हैं, जो उन्होंने अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में भरे थे। इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों ने दस्तावेज सत्यापन, शारीरिक परीक्षण और प्रारंभिक परीक्षा में हिस्सा लिया। उनके प्रवेश पत्र में भी यही नाम दर्ज थे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परिणाम में किसी भी तरह का कोई हेर-फेर नहीं हुआ है और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो और रील्स पूरी तरह से भ्रामक हैं।
विवादित नामों और रोल नंबर का विवरण:
क्रमांक 93: रोल नंबर 2402101319 – नाम: MANBAS
क्रमांक 467: रोल नंबर 2402105174 – नाम: SPACERANI
क्रमांक 6074: रोल नंबर 2402148213 – नाम: NEWS
भर्ती सूची में इन नामों के आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए राज्य सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने लिखा कि सीजी पीएससी द्वारा आयोजित सब इंस्पेक्टर प्री एग्जाम में 'न्यूज' और 'स्पेशरानी' को सफलता मिली है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने की जांच की मांग
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने चयन सूची में सामने आए इन नामों पर संदेह जताते हुए पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग रखी है। कांग्रेस का कहना है कि भर्ती की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मामले की गहन जांच होनी चाहिए।
विवादों से रहा है पुराना नाता
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाएं पिछले दो दशकों में पहले भी विवादों में रही हैं। कुछ मामलों में मामला अदालत और जांच एजेंसियों तक पहुंचा है:
राज्य सेवा परीक्षा 2022: इस परीक्षा में प्रभावशाली नेताओं, वरिष्ठ अफसरों और आयोग से जुड़े लोगों के रिश्तेदारों को अनुचित लाभ देकर चयनित कराने के आरोप लगे थे। वर्ष 2024 में राज्य सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने इस मामले में पूर्व पीएससी अध्यक्ष, अधिकारियों और कई चयनित अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पूर्व सीजी पीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी फिलहाल जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिका भी अदालत से खारिज हो चुकी है।
राज्य सेवा परीक्षा 2003: इस परीक्षा में भी मूल्यांकन और स्केलिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी कर चयन प्रभावित करने के आरोप लगे थे। वर्ष 2017 में हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं मानते हुए पूरे चयन को अवैध ठहराने का फैसला दिया था। यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
