वासेपुर के भगोड़े गैंगस्टर को अंबिकापुर में 13 साल तक मिला संरक्षण: डॉन फहीम खान की मां-मौसी का किया था मर्डर; पनाह देने वाले राजहंस बस संचालक पर FIR
अंबिकापुर.झारखंड के वासेपुर के वांटेड गैंगस्टर शब्बीर आलम को अंबिकापुर में 13 साल तक छिपाकर रखने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। राजहंस बस के संचालक वैदुल खान के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। गैंगस्टर शब्बीर आलम साल 2013 से अंबिकापुर के मोमिनपुरा इलाके में रह रहा था। बस संचालक यह जानता था कि वह हत्या का दोषी है, इसके बाद भी उसने उसे बस कंपनी और सिलाई दुकान की आड़ में पनाह दी।
6 दिन पहले सादी वर्दी में आई थी पुलिस, मौका पाकर भागा गैंगस्टर
बॉलीवुड की फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की असली कहानी का यह किरदार पिछले 13 साल से मोमिनपुरा में छिपा हुआ था। 6 दिन पहले धनबाद पुलिस की टीम उसे पकड़ने के लिए अंबिकापुर के मोमिनपुरा पहुंची थी। इस दौरान पुलिस सादी वर्दी में थी। सादे कपड़ों में पुलिस को देखकर स्थानीय लोगों और गैंगस्टर के परिचितों ने आपत्ति जताई और हंगामा हो गया। इसी का फायदा उठाकर गैंगस्टर शब्बीर आलम वहां से फरार हो गया। उसके भागने के बाद धनबाद पुलिस ने सरगुजा एसएसपी को सूचना दी। स्थानीय पुलिस ने काफी खोजबीन की, लेकिन वह हाथ नहीं आया।
छानबीन में सामने आया बस संचालक का नाम
गैंगस्टर के पुलिस को चकमा देकर भागने के बाद जब अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने मामले की छानबीन की, तो राजहंस बस के संचालक वैदुल खान का नाम सामने आया। जांच में पता चला कि वैदुल खान ने मोमिनपुरा में उसे रुकने की जगह दी थी। 13 साल तक एक अपराधी को संरक्षण देने के मामले में पुलिस ने अब बस संचालक पर अपराध दर्ज कर लिया है।
2001 में गोलियों से भूना था डॉन की मां और मौसी को
झारखंड (उस समय बिहार) के धनबाद जिले के वासेपुर में कोल माफिया डॉन फहीम खान और गैंगस्टर शब्बीर आलम के परिवारों के बीच कोयले के वर्चस्व और वसूली को लेकर पुरानी खूनी रंजिश थी। इसी रंजिश के कारण 18 अक्टूबर 2001 को शब्बीर आलम और उसके बड़े भाई साहिद ने अपने साथियों के साथ मिलकर डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून पर हमला किया था। दोनों बाजार से लौट रही थीं, तभी धनबाद के डायमंड क्रॉसिंग के पास उन्हें गोलियों से भून दिया गया। इस घटना में दोनों की मौत हो गई थी।
कोर्ट से भागा था, हाईकोर्ट ने कुर्क की थी संपत्ति
डॉन के परिवार में हुई इस हत्या के मामले में पुलिस ने साल 2013 में शब्बीर आलम, उसके भाई शाहिद समेत कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। इसी दौरान शब्बीर आलम कोर्ट से फरार हो गया। इस मामले में साल 2018 में झारखंड हाईकोर्ट ने बाकी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही हाईकोर्ट ने फरार गैंगस्टर शब्बीर आलम को भगोड़ा घोषित करते हुए उसकी संपत्तियों की कुर्की के आदेश दिए थे।
असल कहानी पर बनी थी गैंग्स ऑफ वासेपुर
वासेपुर के इन गैंगस्टर्स की असल कहानी से प्रेरित होकर ही डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' मूवी बनाई थी, जो साल 2012 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में डॉन फहीम खान का किरदार पहले भाग में मनोज वाजपेयी और दूसरे भाग में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने निभाया था।
