कोटवार नियुक्ति पर बवाल: अपात्र महिला की नियुक्ति का आरोप, विरोध में उतरे 100 से ज्यादा ग्रामीण
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में कोटवार की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। देवभोग तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत खुटगांव में नई नियुक्ति के विरोध में ग्रामीण खुलकर सामने आ गए हैं। आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए एक अपात्र महिला को कोटवार नियुक्त कर दिया गया। इससे नाराज 100 से अधिक ग्रामीण तहसील कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने नियुक्ति रद्द कर नियमानुसार दोबारा प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की नियुक्ति का मामला नहीं, बल्कि पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता से जुड़ा विषय है। यदि समय रहते मामले का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ग्रामसभा के प्रस्ताव को नजरअंदाज करने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के तत्कालीन कोटवार गुलाब बघेल के निधन के बाद रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए ग्रामसभा आयोजित की गई थी। बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से उत्तराधिकारी का नाम प्रस्तावित कर प्रशासन को भेजा था। लेकिन आरोप है कि ग्रामसभा की अनुशंसा को दरकिनार करते हुए दूसरे परिवार की महिला को नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इससे गांव में असंतोष का माहौल है और लोगों का प्रशासनिक प्रक्रिया पर भरोसा भी प्रभावित हुआ है। उनका आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया में स्थानीय राय और परंपरागत व्यवस्था को महत्व नहीं दिया गया।
तहसील कार्यालय पहुंचकर जताया विरोध
नियुक्ति के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण तहसील कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई। प्रदर्शन में महिलाओं और बुजुर्गों की भी भागीदारी रही। ग्रामीणों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नियुक्ति नियमों के विपरीत हुई है तो उसे तत्काल निरस्त किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्च अधिकारियों से लेकर शासन स्तर तक शिकायत करेंगे।
सरपंच बोले- कमिश्नर और कोर्ट तक जाएंगे
मामले को लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच ने भी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर प्रशासन स्तर पर समाधान नहीं निकला तो पूरे मामले को संभागायुक्त के समक्ष उठाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण भी ली जाएगी ताकि नियुक्ति प्रक्रिया की वैधानिक जांच हो सके।
तहसीलदार ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, तहसीलदार ने ग्रामीणों के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि कोटवार की नियुक्ति निर्धारित नियमों और शासन द्वारा प्रदत्त अधिकारों के तहत की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया विधिसम्मत तरीके से पूरी की गई है और किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती गई। फिलहाल, ग्रामीण अपने आरोपों पर कायम हैं, जबकि प्रशासन नियुक्ति को नियमसम्मत बता रहा है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मामले में आगे जांच होती है या फिर विवाद कानूनी लड़ाई तक पहुंचता है।
