आदिवासी बच्चों की शिक्षा भगवान भरोसे? पोर्टा केबिन में SP की जगह लिख दिया अभिनेत्री का नाम, शिक्षा मंत्री भी निकले पुराने!

आदिवासी बच्चों की शिक्षा भगवान भरोसे? पोर्टा केबिन में SP की जगह लिख दिया अभिनेत्री का नाम, शिक्षा मंत्री भी निकले पुराने!

सुकमा। नक्सल प्रभावित आदिवासी इलाकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से स्थापित पोर्टा केबिन विद्यालयों में प्रशासनिक लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सुकमा जिले के बुड़दी पोर्टा केबिन में लगे सूचना पटल पर वर्तमान प्रशासनिक अधिकारियों की जगह वर्षों पुराने और कई मामलों में गलत नाम दर्ज पाए गए है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस अधीक्षक के नाम वाले स्थान पर एक टीवी अभिनेत्री का नाम लिखा मिला है, जबकि राज्य के शिक्षा मंत्री के रूप में भी पूर्व मंत्री का नाम अंकित था। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि 4 जुलाई 2026 को विद्यालय परिसर में लगे प्रशासनिक सूचना पटल की तस्वीर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। इस पोर्टा केबिन में करीब 350 आदिवासी छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिन्हें बेहतर आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यहां रखा गया है। लेकिन विद्यालय की दीवार पर दर्ज जानकारी ने व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया।

सूचना पटल पर कई अहम पदों की जानकारी निकली गलत
विद्यालय में प्रदर्शित सूची में जिला और राज्य स्तर के कई अधिकारियों के नाम पुराने या गलत पाए गए। आरोप है कि पुलिस अधीक्षक के नाम के स्थान पर "जिया चौहान" नाम दर्ज था, जो किसी प्रशासनिक अधिकारी का नहीं, बल्कि मनोरंजन जगत से जुड़ा नाम बताया जा रहा है। वहीं, वर्तमान जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के नाम भी अपडेट नहीं किए गए थे। इसके अलावा मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी पुराने अधिकारियों के नाम लिखे हुए मिले। जिन अधिकारियों का नाम बोर्ड पर अंकित है, उनमें से कई का तबादला काफी पहले अन्य जिलों में हो चुका है।school

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schoolशिक्षा मंत्री के रूप में अब भी दर्ज है पूर्व मंत्री का नाम
सूचना पटल पर राज्य के शिक्षा मंत्री के रूप में पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम का नाम लिखा हुआ मिला। जबकि वर्तमान सरकार में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी बदल चुकी है। इसी तरह अन्य संवैधानिक पदों से संबंधित जानकारी भी अद्यतन नहीं होने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय जैसे संस्थान में इस प्रकार की बुनियादी जानकारी का वर्षों तक अपडेट न होना केवल एक साधारण त्रुटि नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का संकेत है।

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निरीक्षण व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि पोर्टा केबिनों का नियमित निरीक्षण वास्तव में हो रहा होता, तो इतनी स्पष्ट गलतियां लंबे समय तक बनी नहीं रहतीं। उनका सवाल है कि ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO), बीआरसी, सीआरसी और अन्य अधिकारियों के दौरे के बावजूद सूचना पटल में दर्ज गलतियों पर किसी की नजर क्यों नहीं गई। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि विद्यालय के जिम्मेदार कर्मचारी प्रशासनिक जानकारी तक सही ढंग से अद्यतन नहीं रख पा रहे हैं, तो शैक्षणिक गुणवत्ता और अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

शिक्षा विभाग ने जांच के दिए निर्देश
मामले के सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी जी.आर. मंडावी ने इसे गंभीर बताते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिले के सभी पोर्टा केबिनों को एक समान प्रारूप भेजा जा रहा है, ताकि प्रशासनिक जानकारी सही तरीके से प्रदर्शित की जा सके। साथ ही बुड़दी पोर्टा केबिन के अधीक्षक से यह स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा कि सूचना पटल पर गलत और पुरानी जानकारी क्यों प्रदर्शित की गई ?

कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री से शिकायत
जनपद पंचायत उपाध्यक्ष रीना पेद्दी ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी। उनका कहना है कि आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए बनाए गए संस्थानों में ऐसी लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती है।

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