बिलासपुर में ईसाई समाज की जमीन का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा: कथित पदाधिकारी ने कोर्ट में समझौते का खेल कर बेच दी व्यापार विहार की बेशकीमती जमीन

बिलासपुर में ईसाई समाज की जमीन का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा: कथित पदाधिकारी ने कोर्ट में समझौते का खेल कर बेच दी व्यापार विहार की बेशकीमती जमीन

बिलासपुर।शहर में ईसाई समाज की बेशकीमती जमीनों को फर्जी तरीके से बेचने का एक और बड़ा मामला सामने आया है। यूसीएमएस (UCMS) नाम की समिति के कथित पदाधिकारी ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के दम पर व्यापार विहार जैसे महंगे इलाके की जमीन का सौदा कर दिया। यह पूरा मामला मौजा जूना बिलासपुर के पटवारी हल्का नंबर 36 का है।

व्यापार विहार में आज के समय जमीन का बाजार मूल्य लगभग 7000 रुपए स्क्वायर फीट है। इसी बेशकीमती इलाके में 2600 स्क्वायर फीट के एक बड़े टुकड़े को यूसीएमएस के कथित पदाधिकारी जयदीप रॉबिंसन ने पुलकित आकाश और चित्रलेखा बनवार को बेच दिया। हैरानी की बात यह है कि जयदीप के पास इस जमीन को बेचने का कोई असली अधिकार या पावर था ही नहीं।

कोर्ट में समझौते का खेल

इस फर्जीवाड़े को कानूनी रूप देने के लिए एक बड़ी चाल चली गई। जमीन का सौदा होने के बाद दोनों पक्षों (जयदीप रॉबिंसन और पुलकित आकाश) ने प्रथम व्यवहार न्यायाधीश, बिलासपुर के कोर्ट में स्वत्व (मालिकाना हक) की घोषणा का एक वाद प्रस्तुत किया। वाद के दौरान दोनों पक्षों ने आपस में ही समझौता कर लिया और बड़ी ही आसानी से कोर्ट से डिक्री हासिल कर ली। इसी डिक्री को आधार बनाकर न्यायालय अतिरिक्त तहसीलदार, बिलासपुर में पुलकित आकाश के नाम पर जमीन का रिकॉर्ड भी दुरुस्त (म्यूटेशन) करा लिया गया।

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हाई कोर्ट से असली अटॉर्नी को मिली राहत

इस पूरे खेल का पता चलने पर यूसीएमएस के असल अटॉर्नी होल्डर डॉ. प्रयास कुमार प्रकाश ने कानूनी लड़ाई शुरू की। पहले उन्होंने व्यवहार न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया, लेकिन जब वहां से उन्हें अनुतोष (राहत) नहीं मिली, तो उन्होंने न्याय के लिए बिलासपुर हाई कोर्ट में डब्ल्यूपीसी 227/2026 दायर की। हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले की बारीकियों को गंभीरता से समझा और डॉ. प्रकाश को राहत देते हुए आदेश दिया कि वे मामले को वापस सिविल कोर्ट में प्रस्तुत करें और वहां अपनी पूरी बात रखें। अब यह मामला दोबारा व्यवहार न्यायालय पहुंच गया है।

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सक्रिय है संगठित गिरोह

 

जयदीप रॉबिंसन का यह कोई पहला कारनामा नहीं है। कुछ ही दिन पूर्व व्यवहार न्यायालय ने ही इन्हीं तथ्यों के आधार पर जयदीप के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। वह पुराना मामला नजूल की भूमि से जुड़ा था, जबकि व्यापार विहार का यह ताजा मामला लगानी भूमि का है। खास बात यह है कि दोनों ही स्थानों पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का एक ही जैसा इस्तेमाल हुआ है।

एक के बाद एक सामने आ रहे इन मामलों से यह साफ नजर आता है कि शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में एक बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है। यह गिरोह फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के दम पर यूसीएमएस, सीएनआईटीए और सीएनआई की बेशकीमती भूमियों को टुकड़ों में बेचने का काम धड़ल्ले से कर रहा है।

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