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तड़प तड़प के आई मौत आठ घंटे मौत से लड़ता रहा दिल्ली का यह कपल, एक्सप्रेसवे पर सैकड़ों गाड़ियां गुजरीं पर किसी ने पलटकर नहीं देखा..
जय शंकर पाण्डेय....
दिल्ली। दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे पर पिछले हफ्ते जो हुआ, उसने सिर्फ सड़क सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि इंसानियत पर भी गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। दिल्ली के एक दंपति लच्छी राम (42) और उनकी पत्नी कुसुमलता (38) की देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। दुःखद यह है कि टक्कर लगने के बाद पति पत्नी करीब आठ घंटे तक हाईवे किनारे पलटी कार में खून से लथपथ फंसे रहे और सैकड़ों गाड़ियां उनके पास से गुजर गईं, लेकिन इस दौरान मदद के लिए कोई नहीं रुका। परिवार का आरोप है कि एक्सप्रेस वे की पेट्रोलिंग टीम भी पूरे आठ घंटे तक लापता रही।
रात 11:52 पर पहली टक्कर, 12:14 पर दूसरी: दो बार हुआ हादसा
पूरा मामला मंगलवार देर रात का है। रात करीब 11:52 बजे लच्छी राम की वैगनआर कार को एक बड़े डंपर ने टक्कर मार दी। टक्कर के बाद कार सड़क के किनारे हो गई। पति पत्नी घायल थे, लेकिन जिंदा थे। दरवाजे जाम होने के कारण वे बाहर नहीं निकल पाए। इसके ठीक 22 मिनट बाद रात 12:14 बजे एक मारुति अर्टिगा ने उसी रुकी हुई कार को फिर से टक्कर मार दी। इस दूसरी टक्कर से कार पलट गई और दंपति अंदर ही फंस गए। एक्सप्रेसवे पर रात भर वाहन फर्राटा भरते रहे, लेकिन किसी ने भी पलटी हुई कार और उसमें फंसे घायलों की मदद नहीं की।
मदद का इंतजार करते मर गए..... पर कोई नहीं आया
लच्छी राम के मामा नाहर सिंह ने दुःख जताते हुए प्रशासन पर सवाल खड़े किए और कहा, पूरी तरह क्षतिग्रस्त कार में दो लोग खून से लथपथ फंसे थे, ऐसे में कोई कैसे बिना देखे निकल सकता है? उन्होंने आरोप लगाया कि जब एनएचएआई की गश्ती गाड़ियां हर घंटे निकलती हैं, तो उन्हें यह कार क्यों नहीं दिखी? इसका मतलब है कि या तो वे लापरवाह थे या फिर सारी गश्त सिर्फ कागजों पर ही हो रही है। अगर पुलिस समय पर पहुंच जाती, तो उनकी जान बच सकती थी।
मृतक के पिता देवी सिंह ने रोते हुए कहा कि उन्हें इस तरह नहीं मरना चाहिए था। उन्होंने रोते हुए कहा, वह मदद का इंतजार करते मर गए। अधिकारी इतने गैरजिम्मेदार कैसे हो सकते हैं?" उन्होंने बताया कि वह रात भर बेटे को कॉल करते रहे। पहले कॉल लग रहा था, पर कुछ देर बाद बंद हो गया। सुबह 8 बजे जब कॉल लगा, तो एक पुलिसकर्मी ने उठाया। लच्छी राम के चचेरे भाई दीपक सिंह ने कहा कि दूसरी बार टक्कर मारने वाला ड्राइवर भी मदद कर सकता था। उनकी भाभी को शायद कम चोट लगी थी। थोड़ी सी मदद मिल जाती तो कम से कम एक जिंदगी बच जाती।
सुबह 7:38 बजे पुलिस को मिली सूचना
हादसे के करीब आठ घंटे बाद सुबह गांव के कुछ लोगों ने पलटी कार को देखा और अंदर फंसे पति पत्नी को देखकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस को सुबह 7:38 बजे मामले की सूचना मिली। जब तक एक्सप्रेसवे पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची, तब तक लच्छी राम और कुसुमलता की मौत हो चुकी थी। अगर पेट्रोलिंग टीम समय रहते अपनी ड्यूटी निभाती, तो शायद दो जिंदगियां बच सकती थीं।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
