तेलंगाना निकाय चुनाव के बाद ‘रिफंड पॉलिटिक्स’: हार के बाद उम्मीदवारों ने मांगे कैश और गिफ्ट, कई जिलों में विवाद

तेलंगाना निकाय चुनाव के बाद ‘रिफंड पॉलिटिक्स’: हार के बाद उम्मीदवारों ने मांगे कैश और गिफ्ट, कई जिलों में विवाद

हैदराबाद। तेलंगाना में नगरपालिका चुनाव नतीजों के एक सप्ताह बाद अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। राज्य के विभिन्न जिलों से खबरें हैं कि कुछ पराजित उम्मीदवार कथित तौर पर घर-घर जाकर प्रचार के दौरान बांटी गई नकदी और उपहार वापस मांग रहे हैं। कई जगहों पर इसको लेकर तीखी बहस और झड़प की सूचना है, जबकि सोशल मीडिया पर संबंधित वीडियो वायरल हो रहे हैं। राज्य चुनाव अधिकारियों ने कहा है कि अब तक पैसे बांटने या उन्हें वापस लेने की कोशिशों के संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर तनाव की खबरों के मद्देनज़र प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

किन जिलों से आईं रिपोर्ट्स
सूत्रों के अनुसार, मेडचल मलकाजगिरी, खम्मम, सूर्यपेट, पेड्डापल्ली, भद्राद्री कोठागुडेम, जगतियाल और निजामाबाद जिलों में उम्मीदवारों और मतदाताओं के बीच विवाद की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ वीडियो में एक उम्मीदवार को लगभग 2,500 मूल्य के प्रेशर कुकर वापस मांगते हुए देखा गया। अन्य क्लिप्स में साड़ियां और नकदी लौटाने की मांग को लेकर बहस होती दिख रही है। कुछ मतदाताओं ने स्वेच्छा से सामान लौटाया, जबकि कई लोगों ने इसे अस्वीकार कर दिया और कानूनी कार्रवाई की चुनौती दी।images

मतदान से पहले कथित वितरण
स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, मतदान से एक दिन पहले कुछ वार्डों और नगरपालिकाओं में प्रति वोट 2,500 से 3,000 तक नकद बांटने के आरोप लगे हैं। महिला मतदाताओं को कथित तौर पर प्रेशर कुकर और साड़ियां भी दी गईं। चुनाव परिणाम प्रतिकूल आने के बाद कुछ उम्मीदवारों चाहे वे पार्टी से जुड़े हों या निर्दलीय को संदेह हुआ कि कुछ कॉलोनियों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला, जिसके बाद ‘रिफंड’ की मांग शुरू हुई।

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कानूनी और प्रशासनिक पहलू
चुनावी आचार संहिता के तहत मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए नकदी या उपहार बांटना गंभीर उल्लंघन माना जाता है। हालांकि, अब तक इन आरोपों पर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज न होने की बात कही गई है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि ठोस साक्ष्य या शिकायत मिलती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने राजनीतिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम स्थानीय निकाय चुनावों में पारदर्शिता और जवाबदेही के सवालों को फिर से केंद्र में ले आया है।

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