बिलासपुर में रेत-गिट्टी का काला खेल: रात के अंधेरे में डंपिंग, दिन में ट्रैक्टरों से सप्लाई; सो रहा प्रशासन

बिलासपुर। शहर में अवैध रेत और गिट्टी का कारोबार अब डंके की चोट पर चल रहा है। माफियाओं ने शहर के खाली प्लॉटों को अपना अघोषित डंपिंग यार्ड' बना लिया है। खेल कुछ ऐसा है कि रात के अंधेरे में भारी वाहनों से माल उतारा जाता है और दिन चढ़ते ही इसे महंगे दामों पर शहर भर में खपा दिया जाता है। ताज्जुब की बात यह है कि पुलिस, खनिज और परिवहन विभाग की नाक के नीचे यह सब हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।

बिलासपुर और इसके बाहरी इलाकों में अवैध भंडारण का यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। माफिया रात में हाइवा और ट्रेलर के जरिए रेत-गिट्टी लाकर खाली जमीनों पर डंप कर देते हैं। सूरज निकलते ही कृषि कार्य में लगे ट्रैक्टरों के जरिए इसकी सप्लाई शुरू हो जाती है। इस अवैध कारोबार से न केवल सरकार को लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि अवैध खनन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

इन इलाकों में सज गए अवैध 'बाजार'

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शहर के कई प्रमुख रास्तों और रिहायशी इलाकों में माफियाओं ने अपने ठिकाने बना लिए हैं। सबसे बुरा हाल सरकंडा, तिफरा और साइंस कॉलेज रोड और देवरीखुर्द का है:

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  •  सरकंडा मुक्तिधाम रोड: यहां मार्क अस्पताल के पास खाली पड़ी जमीन पर रेत और गिट्टी के बड़े-बड़े ढेर देखे जा सकते हैं।
  •   साइंस कॉलेज रोड: कॉलेज से चांटीडीह बाजार जाने वाली सड़क के किनारे भारी मात्रा में निर्माण सामग्री डंप की जा रही है।
  •   तिफरा क्षेत्र: यदुनंदन नगर में शराब दुकान के पास की खाली जमीन को भी माफियाओं ने डंपिंग यार्ड बना दिया है।
  • देवरीखुर्द मेन रोड: देवरी खुर्द मुख्य सड़क पर भी बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री डंप की गई है। Fci रोड का हाल भी बेहाल है 

पहचान छिपाने के लिए हटा रहे नंबर प्लेट

अवैध परिवहन में लगे वाहन मालिक अब कानून को ठेंगा दिखाने का नया तरीका अपना रहे हैं। पकड़े जाने के डर से कई हाइवा और ट्रैक्टरों की नंबर प्लेट या तो हटा दी गई है या उन्हें मिट्टी से ढक दिया गया है। हाल ही में खनिज विभाग ने कुछ वाहनों पर कार्रवाई की थी, जिनमें से ज्यादातर बिना नंबर के ही सड़कों पर दौड़ रहे थे। इससे साफ है कि माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हैं।

खेती वाले ट्रैक्टरों का निर्माण में इस्तेमाल

नियमों के मुताबिक, जिन ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन कृषि कार्य के लिए हुआ है, उनसे कमर्शियल सप्लाई नहीं की जा सकती। इसके बावजूद शहर में दिन-भर ऐसे सैकड़ों ट्रैक्टर रेत-गिट्टी ढोते नजर आते हैं। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की अनदेखी के कारण ये वाहन शहर की गलियों में बेखौफ घूम रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।

 

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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