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शराब घोटाले में बघेल परिवार की बढ़ी मुसीबत: चैतन्य के खिलाफ 3890 पन्नों का चालान पेश और 250 करोड़ के लेनदेन का दावा
रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की कानूनी मुश्किलें अब और गहरा गई हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा यानी ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में उनके खिलाफ 3890 पन्नों का भारी-भरकम आठवां पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाले की काली कमाई में से करीब 200 से 250 करोड़ रुपये चैतन्य बघेल तक पहुंचे हैं। इधर कोर्ट ने मामले से जुड़े निरंजन दास को 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है जबकि सौम्या चौरसिया को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। इस नए खुलासे के बाद अब चैतन्य बघेल का जेल से बाहर आना नामुमकिन नजर आ रहा है।
व्हाट्सऐप चैट ने खोली पोल और अफसरों पर गिरी गाज
ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि यह बड़ा खुलासा सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर जैसे रसूखदारों के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट से हुआ है। जांच में सामने आया है कि चैतन्य बघेल ने शराब माफियाओं की मदद से करीब 1000 करोड़ रुपये के काले धन को सफेद करने में अहम भूमिका निभाई। प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार चैतन्य ने करीब 16 करोड़ रुपये का सीधा फायदा उठाकर उसे अपने बिजनेस में लगाया। इस बीच कोर्ट की कार्यवाही में निरंजन दास की रिमांड बढ़ने से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
फर्जी फ्लैट और रीयल एस्टेट में खपाई गई काली कमाई
जांच एजेंसियों का आरोप है कि चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लो के साथ मिलकर विट्ठलपुरम प्रोजेक्ट में फर्जी तरीके से फ्लैट खरीदने का नाटक रचा और 5 करोड़ रुपये डकारे। ये फ्लैट कर्मचारियों के नाम पर बुक किए गए थे लेकिन इनका असली मालिक चैतन्य को बताया जा रहा है। 18 जुलाई से जेल में बंद चैतन्य पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी बैंक एंट्री और कैश के जरिए करोड़ों रुपये रीयल एस्टेट में निवेश किए। यह पूरी रकम अनवर ढेबर के जरिए सिंडिकेट बनाकर उगाही गई थी।
घोटाले का पूरा कच्चा चिट्ठा
छत्तीसगढ़ का यह शराब घोटाला अब तक का सबसे चर्चित मामला बन गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि तत्कालीन सरकार के दौर में आईएएस अधिकारियों और कारोबारियों ने मिलकर एक ऐसा सिंडिकेट बनाया जिसने सरकारी खजाने को जमकर चूना लगाया। अब जब 3890 पन्नों का पुलिंदा कोर्ट के सामने है तो कई और बड़े नामों की नींद उड़ना तय है। रसूख के दम पर काली कमाई का जो महल खड़ा किया गया था उसकी एक-एक ईंट अब बिखरती नजर आ रही है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
