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डीएसपी को फर्जी चैट से फंसाने वाले हिस्ट्रीशीटर दीपक टंडन का एक और फर्जीवाड़ा: सरिता का होटल किराए पर लेकर जमाया कब्जा, 2 लाख 26 हजार टैक्स बकाया होने पर निगम ने किया सील
बिलासपुर। रायपुर: छत्तीसगढ़ में पुलिस महकमे की एक वरिष्ठ महिला अधिकारी डीएसपी कल्पना वर्मा को फर्जी व्हाट्सएप चैट के जरिए बदनाम कर निलंबित कराने वाला कथित 'पीड़ित' कारोबारी दीपक टंडन असल में एक शातिर हिस्ट्रीशीटर है। पूरे प्रदेश में 21 से अधिक आपराधिक मामलों का सामना कर रहे दीपक टंडन का अब एक नया और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। डीएसपी को अपने बुने हुए जाल में फंसाकर खुद को बेगुनाह साबित करने की कोशिश करने वाले इस शातिर अपराधी ने 'होटल वेलकम श्री' पर भी अवैध रूप से कब्जा जमा रखा था। उसने यह संपत्ति सरिता बाजपेई से किराए पर ली थी, लेकिन बाद में न तो किराया दिया और न ही नगर निगम का टैक्स भरा। अब लगभग 2 लाख 26 हजार 7 सौ 39 रुपये का भारी-भरकम टैक्स बकाया होने पर नगर निगम के अमले ने सख्त कार्रवाई करते हुए इस होटल को सील कर दिया है।

होटल वेलकम श्री का पूरा सच: किराएदार से बन बैठा था मालिक
दीपक टंडन की धोखाधड़ी का दायरा केवल पुलिस को गुमराह करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दूसरों की संपत्तियों पर कुंडली मारकर बैठने का भी आदी है। पुख्ता जानकारी के अनुसार, 'होटल वेलकम श्री' की असली मालकिन सरिता बाजपेई हैं। दीपक टंडन ने शुरुआत में इस होटल को सरिता से बकायदा एग्रीमेंट के तहत किराए पर लिया था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, इस हिस्ट्रीशीटर ने अपनी नीयत बदल ली और दबंगई दिखाना शुरू कर दिया। उसने न केवल सरिता बाजपेई को होटल का मासिक किराया देना बंद कर दिया, बल्कि धीरे-धीरे पूरे होटल पर अपना एकाधिकार जमा लिया। वह शहर में खुद को इस होटल का असली मालिक बताकर इसका बेखौफ संचालन कर रहा था। जानकारी यह भी मिली है कि दीपक टंडन इस होटल से अवैध गतिविधियां संचालित करता था।

इस अवैध कब्जे के दौरान टंडन ने नगर निगम के नियमों की भी जमकर धज्जियां उड़ाईं। उसने सालों तक होटल का संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) जमा नहीं किया। जब निगम का बकाया टैक्स लगभग 226739 रुपये तक पहुंच गया और कई नोटिसों के बाद भी टंडन की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, तो निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर होटल को सील कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान जब्ती का जो पंचनामा तैयार किया गया, उसमें संपत्ति की असली मालिक के रूप में सरिता बाजपेई का ही नाम दर्ज मिला। इस सरकारी दस्तावेज ने टंडन के उस झूठ की पोल खोल दी, जिसमें वह खुद को होटल का मालिक बताकर लोगों की आंखों में धूल झोंक रहा था।

डीएसपी कल्पना वर्मा मामला: फर्जी चैट से रची गई थी निलंबन की साजिश
होटल वेलकम श्री के इस सनसनीखेज खुलासे ने उस हाई-प्रोफाइल डीएसपी कल्पना वर्मा प्रकरण की परतें भी उधेड़ कर रख दी हैं, जिसने पिछले दिनों पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मचा दिया था। दीपक टंडन ने ही वरिष्ठ अधिकारियों के सामने खुद को पीड़ित बताकर एक मनगढ़ंत कहानी रची थी। उसने आरोप लगाया था कि डीएसपी ने उसे हनीट्रैप में फंसाकर करोड़ों रुपये और गाड़ियां ऐंठ ली हैं।
लेकिन अब जो तथ्य उभर कर सामने आ रहे हैं, वे पूरी कहानी को पलट रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, टंडन ने डीएसपी को बदनाम करने और उन्हें उनके पद से हटाने के लिए पूरी तरह से फर्जी व्हाट्सएप चैट का सहारा लिया था। इन्हीं कूट रचित और फर्जी चैट्स को मुख्य आधार बनाकर उसने शासन-प्रशासन को गुमराह किया, जिसके दबाव में आकर राज्य सरकार ने डीएसपी कल्पना वर्मा को निलंबित कर दिया था। एक महिला अधिकारी को साजिश के तहत फंसाने वाला टंडन अब खुद अपने बिछाए जाल में बुरी तरह उलझता नजर आ रहा है।
21 मुकदमों का आरोपी है हिस्ट्रीशीटर दीपक टंडन
पुलिस के आला अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर अपनी झूठी शिकायत दर्ज कराने वाला दीपक टंडन कोई आम कारोबारी नहीं, बल्कि एक पेशेवर अपराधी और घोषित हिस्ट्रीशीटर है। पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चलता है कि उसके खिलाफ पूरे छत्तीसगढ़ के अलग-अलग थानों में धोखाधड़ी, अवैध कब्जा, ब्लैकमेलिंग और अन्य संगीन अपराधों के 21 से अधिक मामले पहले से ही दर्ज हैं। उसका काम करने का तरीका (मोडस ऑपरेंडी) ही यही है कि पहले लोगों का विश्वास जीतो, फिर उनकी संपत्ति हथिया लो, और अगर कोई विरोध करे तो फर्जी साक्ष्यों के जरिए उसे फंसा दो।
अब आगे क्या: पुलिस कस सकती है नकेल
नगर निगम की इस सीलबंद कार्रवाई और पंचनामे में सरिता बाजपेई का नाम आने के बाद दीपक टंडन का असली चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। डीएसपी कल्पना वर्मा प्रकरण में भी अब पुलिस नए सिरे से जांच करने की तैयारी में है, क्योंकि फर्जी चैट और सुनियोजित साजिश के सुबूत इस हिस्ट्रीशीटर की मनगढ़ंत कहानी को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। जिस तरह से टंडन ने एक महिला अधिकारी की छवि धूमिल की और दूसरी महिला की संपत्ति पर कब्जा किया, उसे देखते हुए अब पुलिस और प्रशासन उसके अन्य काले कारनामों की भी जन्मकुंडली खंगालने में जुट गया है। तय माना जा रहा है कि जल्द ही इस हिस्ट्रीशीटर पर पुलिस बड़ी कार्रवाई करेगी
इधर निगम प्रशासन ने भी साफ किया है कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना सील तोड़ने पर छत्तीसगढ़ नगर निगम अधिनियम 1956 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी इसमें भारी जुर्माना बिजली पानी कनेक्शन काटना और भारतीय न्याय संहिता बीएस के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर कारावास तक का प्रावधान शामिल है
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
