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शराब घोटाले में रिहा होने के बाद चैतन्य बघेल की रॉयल स्टंटबाजी, ट्रैफिक नियमो की जमकर उड़ी धज्जियां
शराब घोटाले में जेल से छूटे चैतन्य बघेल ने कार की छत पर चढ़कर किया स्टंट। रायपुर से भिलाई तक लगा जाम। क्या होगी पुलिस कार्रवाई?
रायपुर। शराब घोटाले में 170 दिन जेल की हवा खाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल शनिवार शाम रिहा तो हुए, लेकिन उनका बाहर आने का अंदाज किसी बड़े विवाद से कम नहीं रहा। हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जब वे रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर निकले, तो उनके कांग्रेस समर्थकों ने नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चैतन्य बघेल चलती कार के ऊपर चढ़कर फिल्मी स्टाइल में स्टंट करते नजर आए। रायपुर से भिलाई तक निकली इस रसूखदार रैली के कारण हाईवे पर घंटों जाम लगा रहा और आम जनता परेशान होती रही। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है या रईसजादों और नेताओं के बेटों पर भी पुलिस कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाएगी?
शनिवार शाम जेल से बाहर आते ही चैतन्य बघेल का स्वागत किसी जंग जीतकर आए योद्धा की तरह किया गया। वे लग्जरी कार की छत पर सवार होकर हाथ जोड़ते और समर्थकों का अभिवादन करते दिखे। रसूख का प्रदर्शन ऐसा था कि ट्रैफिक के नियमों को पैरों तले रौंद दिया गया। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ महीनों से कार की छत पर चढ़ने या खिड़की से लटककर स्टंट करने वालों पर पुलिस ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस की खामोशी पर उंगलियां उठ रही हैं।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी बेखौफ रईसजादे
बिलासपुर हाईकोर्ट ने हाल ही में सड़कों पर स्टंटबाजी और रील बनाने वालों पर कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट के सख्त आदेश हैं कि ऐसे लोगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर गाड़ियां जब्त की जाएं। बावजूद इसके, सत्ता और रसूख की चमक के आगे कानून बेबस नजर आ रहा है। रायपुर से भिलाई के बीच सैकड़ों गाड़ियों का काफिला और उस पर सवार होकर स्टंट करते नेता पुत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
छत्तीसगढ़ में स्टंटबाजों पर हालिया कार्रवाई का विवरण....
बिलासपुर में कुछ दिन पहले चलती कार की छत पर बैठकर और सायरन बजाकर रील बनाने वाले युवकों को पुलिस ने सलाखों के पीछे भेजा और उनकी कार के साथ ड्रोन कैमरा भी जब्त कर लिया। इसी तरह दुर्ग-भिलाई में चलती कार के गेट पर बैठकर स्टंट करने वाले एक छात्र नेता सहित तीन लोगों का भारी-भरकम चालान काटा गया और गाड़ियां थाने में खड़ी करा दी गईं। राजधानी रायपुर में भी नेशनल हाईवे पर सन-रूफ से लटककर हुड़दंग करने वाले कई रईसजादों की गाड़ियां पुलिस ने जब्त की हैं।
संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन: आरोपी के साथ 'सायरन' और 'फॉलो गार्ड' के उपयोग पर उठे सवाल
इस मामले में संवैधानिक पदों की गरिमा और उनके साथ मिलने वाले विशेषाधिकारों के दुरुपयोग को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है। चैतन्य बघेल के साथ नेताप्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा सरकारी तामझाम, पायलट गाड़ी और सायरन बजाते हुए ले जाने की घटना ने कानूनी विशेषज्ञों और जनता के बीच तीखी बहस छेड़ दी है। नियमानुसार, 'फॉलो गार्ड' और 'सायरन' का अधिकार केवल पद पर आसीन व्यक्ति की सुरक्षा और कर्तव्य निर्वहन के लिए होता है, न कि किसी आपराधिक आरोपी को संरक्षण देने या उसे 'वीआईपी ट्रीटमेंट' दिलाने के लिए।
इस कृत्य को संवैधानिक नैतिकता के विरुद्ध बताते हुए जानकारों का कहना है कि जब एक सब-इंस्पेक्टर द्वारा केवल पैर छूने पर उसे लाइन अटैच किया जा सकता है, और सिक्किम के मुख्य न्यायाधीश को निजी अतिथि के लिए सरकारी गाड़ी के उपयोग पर पद से हटना पड़ सकता है, तो फिर एक आरोपी को सायरन बजाते हुए स्टंट की तरह ले जाना एक गंभीर 'अपराधिक कृत्य' की श्रेणी में आता है। संवैधानिक पद पर रहते हुए कानून की अवहेलना करना और आरोपी के साथ खड़े होना पद की शपथ का सीधा उल्लंघन है। ऐसे में यह मांग प्रबल हो रही है कि मर्यादाओं को ताक पर रखने वाले इन जनप्रतिनिधियों को अपने पदों पर बने रहने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है और उन्हें तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले में पुलिस के आला अधिकारियों का पक्ष अब तक सामने नहीं आया है। शहर के बुद्धिजीवियों का कहना है कि अगर नियम सबके लिए बराबर हैं, तो इस सार्वजनिक स्टंटबाजी पर भी सख्त एक्शन होना चाहिए ताकि समाज में सही संदेश जाए।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
