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छत्तीसगढ़ में ड्यूटी के दौरान टोंक का लाल शहीद: अगले महीने बेटे की शादी के लिए आना था घर
रायपुर l राजस्थान की माटी ने देश की रक्षा में एक और बेटा खो दिया है। टोंक जिले के घाड़ क्षेत्र के दौलतपुरा निवासी सीआरपीएफ इंस्पेक्टर भंवरलाल मीणा छत्तीसगढ़ में अपनी ड्यूटी निभाते शहीद हो गए। मंगलवार को बस्तर के दुर्गम इलाके में पेट्रोलिंग के दौरान उनकी बाइक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई थी। हादसे के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। शहीद भंवरलाल मीणा 54 साल के थे और सीआरपीएफ की 65वीं बटालियन में तैनात थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरे टोंक जिले में मातम पसर गया है और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
फोन पर कहा था छुट्टी लेकर आऊंगा और बेटे के लिए बहू लाऊंगा
शहीद के घर में इन दिनों खुशियों की तैयारी चल रही थी। उनके परिजनों ने बताया कि 19 जनवरी की रात को ही भंवरलाल से फोन पर लंबी बात हुई थी। उन्होंने वादा किया था कि अगले महीने एक महीने की छुट्टी लेकर गांव आएंगे। घर आते ही उन्हें बेटे लालाराम के लिए लड़की देखनी थी और इसी साल उसकी शादी तय करनी थी। शहीद का बेटा लालाराम भी पिता की तरह देश सेवा में लगा है और फिलहाल पंजाब में भारतीय सेना का जवान है। घर में जिस बेटे की शादी की चर्चा होनी थी वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
तिरंगा यात्रा के साथ पैतृक गांव में दी जाएगी अंतिम विदाई
शहीद भंवरलाल की पार्थिव देह बुधवार सुबह विशेष विमान से जयपुर पहुंची। वहां से सेना और सीआरपीएफ के विशेष वाहन से पार्थिव देह को टोंक लाया जा रहा है। तय कार्यक्रम के अनुसार शव को पहले घाड़ थाने ले जाया जाएगा। वहां से उनके पैतृक गांव दौलतपुरा तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। पूरे रास्ते में ग्रामीणों द्वारा पुष्प वर्षा कर शहीद को नमन किया जाएगा। गांव के श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा जिसमें पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी शामिल होंगे।
सिपाही से शुरू किया था सफर और परिवार के थे इकलौते सहारा
भंवरलाल मीणा का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने एक सिपाही के तौर पर फोर्स जॉइन की थी और अपनी काबिलियत से इंस्पेक्टर के पद तक पहुंचे। उनके बड़े भाई का पहले ही देहांत हो चुका है ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। ग्रामीणों ने बताया कि भंवरलाल जब भी छुट्टी पर आते थे तो गांव के युवाओं को फौज में जाने के लिए प्रेरित करते थे। उनकी शहादत ने न सिर्फ एक परिवार का सहारा छीन लिया है बल्कि देश ने एक निडर जांबाज खो दिया
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
