वन विभाग की भर्ती पर बवाल: फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आरोप, हाईकोर्ट से लेकर ACB तक पहुंचा मामला
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के केशकाल वनमंडल में भारी वाहन चालक की भर्ती को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति दिए जाने का आरोप लगाते हुए एक अभ्यर्थी ने मामले की शिकायत कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP), एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) समेत कई सक्षम प्राधिकारियों से की है। शिकायतकर्ता ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि उनके पास भर्ती से जुड़े दस्तावेज, विभागीय रिकॉर्ड और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी मौजूद है। वहीं इस पूरे विवाद को लेकर हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
कोण्डागांव निवासी मंजीत सिंह चहल ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2023 में प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय द्वारा भारी एवं हल्के वाहन चालक के पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। केशकाल वनमंडल में भारी वाहन चालक के दो पदों के लिए उन्होंने भी आवेदन किया था। शिकायत के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक अन्य अभ्यर्थी विक्की बंजारे द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्र की प्रारंभिक जांच की गई थी। उस समय कथित तौर पर संबंधित प्रमाण पत्र को मान्यता प्राप्त संस्था का नहीं मानते हुए अमान्य माना गया था। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में भी प्रमाण पत्र पर सवाल उठे थे।
'जिस राइस मिल का प्रमाण पत्र, वहां कभी काम ही नहीं किया'
शिकायतकर्ता का आरोप है कि विक्की बंजारे ने हीरा एग्रो राइस मिल, कोण्डागांव के नाम से अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। मंजीत सिंह का दावा है कि शिकायत के बाद संबंधित संस्था से प्राप्त जानकारी में स्पष्ट हुआ कि विक्की बंजारे नाम का कोई व्यक्ति वहां भारी वाहन चालक के रूप में कार्यरत ही नहीं था। इसके बावजूद वर्ष 2026 में उसे भारी वाहन चालक के पद पर नियुक्ति दे दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यदि यह तथ्य सही है तो भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता हुई है और इसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
मेरिट सूची बदलने का भी आरोप
मंजीत सिंह ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि प्रारंभिक मेरिट सूची में उनका स्थान ऊपर था, लेकिन बाद में अंतिम मेरिट सूची में बदलाव कर विक्की बंजारे को प्रथम स्थान पर दिखाया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास विभागीय वेबसाइट से प्राप्त रिकॉर्ड, आरटीआई के जरिए हासिल दस्तावेज और अन्य अभिलेख मौजूद हैं, जो उनके आरोपों का आधार हैं।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने इस विवाद को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है। उनका कहना है कि न्यायालय के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और पूरे मामले की न्यायिक समीक्षा की मांग की गई है।
'13 साल की सेवा के बाद भी न्याय नहीं मिला'
मंजीत सिंह ने बताया कि वह वर्ष 2013-14 से वन विभाग में सेवाएं दे रहे हैं और उत्कृष्ट कार्य के लिए विभाग से प्रशस्ति पत्र भी प्राप्त कर चुके हैं। उनका आरोप है कि योग्य होने के बावजूद उन्हें नियुक्ति से वंचित कर कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दूसरे अभ्यर्थी को लाभ पहुंचाया गया। उन्होंने इसे नियमों और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का उल्लंघन बताया।
SP, कलेक्टर और ACB से कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने राज्यपाल, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), कलेक्टर कोंडागांव, पुलिस अधीक्षक (SP) तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजी है। उन्होंने मांग की है कि पूरे भर्ती प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अनुभव प्रमाण पत्र की सत्यता की जांच हो और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, इस मामले में वन विभाग या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विभाग की ओर से कोई स्पष्टीकरण या पक्ष सामने आता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
