खबर का असर: अमवार परियोजना घोटाले पर ईई ने जांच के आदेश दिए

70 करोड़ के पुनर्वास बजट में गड़बड़ी, 32 परिवार आज भी झोपड़ियों में

खबर का असर: अमवार परियोजना घोटाले पर ईई ने जांच के आदेश दिए

अंबिकापुर। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में कनहर नदी पर बनी अमवार अंतरराज्यीय सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के छह गांव समा गए। साल 2015 में यूपी सरकार ने विस्थापितों के पुनर्वास के लिए 70.34 करोड़ रुपये जारी किए थे। ग्यारह साल बीत गए, लेकिन पुनर्वास अधूरा पड़ा है। छह गांवों के 32 प्रभावित परिवारों को न जमीन मिली, न मकान बनाने की राशि। ये परिवार आज भी झोपड़ियों या रिश्तेदारों के घरों में दिन काटने को मजबूर हैं।  

राष्ट्रीय जगत विजन ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाया था। रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया था कि विस्थापितों के बजट से 18.10 करोड़ रुपये दूसरे मदों में डायवर्ट कर दिए गए। इसमें करीब 16 करोड़ रुपये कोरिया जिले की घुटरा व्यपवर्तन योजना और डैम पर खर्च दिखाए गए। विभागीय जांच में सामने आया कि जिस नहर पर 16 करोड़ खर्च बताए गए, वहां असल काम महज 20 से 25 लाख रुपये का ही हुआ। वह नहर पहली बारिश में बह गई। अब उसी को दोबारा बनाने के लिए 4 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की जा रही है। जगत विजन की इस खबर के बाद सिंचाई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) ने जांच के निर्देश दिए हैं।  

पुनर्वास गांव बना, लेकिन परिवार नहीं बसे  

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बलरामपुर के त्रिशूली में 15.5 हेक्टेयर क्षेत्र में पुनर्वास गांव तैयार किया गया। ग्रामीणों की सहमति के बिना यहां सड़क, स्कूल और अन्य भवन खड़े कर दिए गए। लेकिन 32 विस्थापित परिवारों को न आवासीय पट्टे मिले, न निर्माण राशि। नतीजा यह हुआ कि एक भी परिवार वहां नहीं बस सका। रखरखाव के अभाव में करोड़ों की लागत से बना यह स्थल अब वीरान हो चुका है। भवन मवेशियों के कोठार बन गए हैं। दीवारें टूट रही हैं, छतें गिरने लगी हैं। जिन ग्रामीणों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे, उन्होंने रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए चंदा जुटाकर कथित तौर पर 1.5 लाख रुपये की घूस भी दी। फिर भी उनका मुआवजा अटका हुआ है।  

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विस्थापित परिवार बताते हैं कि सालों से वे इंतजार कर रहे हैं। कुछ लोग रिश्तेदारों के घर में गुजर-बसर कर रहे हैं, कुछ झोपड़ियों में। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं। अमवार डैम से प्रभावित इन गांवों का पुनर्वास आज तक अधूरा है। जगत विजन ने इन परिवारों की पीड़ा को प्रमुखता दी थी। उसी रिपोर्ट के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल शुरू हुई है।  

16 करोड़ में बना डैम भी क्षतिग्रस्त  

घुटरा व्यपवर्तन योजना और डैम पर खर्च दिखाए गए करीब 16 करोड़ रुपये का मामला सबसे गंभीर है। विभागीय जांच के मुताबिक वास्तविक निर्माण कार्य बहुत कम था। नहर पहली ही बारिश में बह गई। अब उसी क्षतिग्रस्त संरचना को दोबारा खड़ा करने के लिए अतिरिक्त राशि मांगी जा रही है। यह पैसा असल में विस्थापितों के पुनर्वास का था।  

जांच में तीन कार्यपालन अभियंता (ईई), पांच डिवीजनल अकाउंट्स ऑफिसर (डीएओ) और एक वरिष्ठ लिपिक को दोषी ठहराया गया है। योजना को बलरामपुर से कोरिया शिफ्ट कराने और फंड को गैर-मद में खर्च करने के दौरान यूएस राम ईई पद पर थे। उनके बाद बीएस साहू पदस्थ हुए। उन्होंने गड़बड़ी वाली फाइलों को आगे बढ़ाया और भुगतानों को मंजूरी दी। जिम्मेदार पांच डीएओ में धर्मेंद्र सिंह, राजू नगडूवार, कमलेश सिंह, विकास कुमार विसाल और संजीव कुमार तिवारी शामिल हैं। भुगतान के चेक पर अनिवार्य दूसरे हस्ताक्षर इन्हीं के होते थे। वरिष्ठ लिपिक ने वित्तीय दस्तावेज और बिल तैयार किए, उनकी जांच की और स्वीकृति के लिए उच्चाधिकारियों के सामने पेश किए। इन्हीं आधार पर भुगतान हुआ।

 क्या कहते हैं  अधिकारी 

रामानुजगंज के इंई एनपी डहरिया कहते हैं, “ये मामला मेरे कार्यकाल से पहले का है। वर्तमान में न फंड उपलब्ध है, न दस्तावेज। रिकॉर्ड बैकुंठपुर में हैं। योजना को रामानुजगंज स्थानांतरित करने के लिए पत्राचार किया गया है।”  

बैकुंठपुर के इंई ए टोपो का कहना है, “प्रभावितों की राशि दूसरे कार्यों में खर्च होने की जानकारी है। शासन स्तर से खाता लॉक होने के कारण शेष राशि का सही विवरण अभी नहीं दिया जा सकता।”  

सिंचाई विभाग अंबिकापुर के चीफ इंजीनियर अनिल खलखो से सीधी बातचीत में उन्होंने कहा, “ईई को प्रभावित गांव और ग्रामीणों को योजना का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं। अमवार योजना के 18 करोड़ रुपये से कोरिया में नहर बनी और वह बह गई। कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह फाइल मंगाकर देखेंगे। विभाग को अवगत कराया गया है। पुनर्वास के 70 करोड़ रुपये का बजट दूसरे जिले में कैसे डायवर्ट हुआ, यह तत्कालीन ईई यूएस राम के समय हुआ। कैसे और किसकी सहमति से हुआ, यह अभी नहीं बता पाऊंगा।”  

ईई का यह कहना कि योजना का खाता लॉक है, क्या रिकॉर्ड दबाने की कोशिश है? खलखो ने जवाब दिया, “इसकी जानकारी नहीं है। दोनों जिलों के ईई को रिकॉर्ड हैंडओवर करने के निर्देश दिए हैं।” बीएस साहू के बाद पदस्थ रहे अधिकारी को रिटायरमेंट से एक दिन पहले विभाग ने गड़बड़ी पर नोटिस भी दिया था।  

राष्ट्रीय जगत विजन की पहल से जांच शुरू  

जगत विजन ने इस पूरे घोटाले को विस्तार से उजागर किया था। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि विस्थापितों के नाम पर जारी 70 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा दूसरे जिले में डायवर्ट कर दिया गया। पुनर्वास स्थल बना, लेकिन परिवार नहीं बसे। नहर पर खर्च दिखाया गया, लेकिन काम न के बराबर हुआ। जगत विजन की इस खबर का सीधा असर दिखा। कार्यपालन अभियंता ने जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। फाइलें मंगाई जा रही हैं। दोनों जिलों के अधिकारियों को रिकॉर्ड सौंपने को कहा गया है।  

32 परिवार अभी भी इंतजार कर रहे हैं। उनके पास न जमीन है, न घर। करोड़ों का पुनर्वास गांव खंडहर बन चुका है। 16 करोड़ का डैम क्षतिग्रस्त पड़ा है। जगत विजन ने इन सवालों को प्रमुखता से उठाया। अब जांच शुरू हो चुकी है। सवाल यह है कि दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और विस्थापित परिवारों को कब उनका हक मिलता है।  

अमवार परियोजना का सच सामने आ चुका है। 70 करोड़ काñ बजट, अधूरा पुनर्वास, डायवर्ट फंड और क्षतिग्रस्त निर्माण। राष्ट्रीय जगत विजन की रिपोर्ट ने प्रशासन को झकझोर दिया है। ईई के जांच निर्देश के बाद अब यह देखना होगा कि गड़बड़ी करने वालों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और डूब क्षेत्र के 32 परिवारों को न्याय मिलता है या नहीं।

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