छत्तीसगढ़ में काले धन की 'पार्किंग' करने वालों की उड़ी नींद, तैयार हो गया कच्चा चिट्ठा!
छत्तीसगढ़ के सियासी और नौकरशाही गलियारों में इन दिनों एक नई सुगबुगाहट है। सुगबुगाहट ऐसी कि कई माननीयों और 'साहबों' की रातों की नींद उड़ चुकी है। वजह है— सिस्टम को दीमक की तरह चाटने वाली भ्रष्ट कमाई और उस काले धन को खपाने के लिए बनाए गए उनके 'पार्किंग प्लेस'। खबर पक्की है कि राज्य में जिन-जिन भ्रष्ट तत्वों ने अवैध उगाही के पैसे को अपने करीबियों, रिश्तेदारों या डमी चेहरों के नाम पर 'पार्क' कर रखा है, वे अब सीधे रडार पर आ चुके हैं।
दरअसल, पर्दे के पीछे चल रहे इस आपराधिक गठजोड़ का बहुत जल्द बड़ा भंडाफोड़ होने वाला है। भनक लगी है कि एक बेहद पुख्ता शिकायतकर्ता ने इस पूरे सिंडिकेट की एक भारी-भरकम फाइल तैयार कर ली है। इस बार बात सिर्फ हवा-हवाई दावों या गुमनाम चिट्ठियों की नहीं है। बकायदा व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ ठोस दस्तावेजी साक्ष्य नत्थी किए गए हैं। किसने, कहां, कितना पैसा खपाया और कौन किस भ्रष्ट आका के लिए 'तिजोरी' बना हुआ है, इसके सारे सबूत इस फाइल में दर्ज हो चुके हैं।
अब सवाल यह है कि यह फाइल जाएगी कहां? तो कान खोलकर सुन लीजिए, यह कोई आम शिकायत नहीं है जो किसी स्थानीय दफ्तर में धूल खाएगी। इस एक्सप्लोसिव डोजियर की सीधी डिलीवरी 'दिल्ली दरबार' में होने जा रही है। भारत सरकार की प्रमुख जांच एवं प्रवर्तन एजेंसियां— प्रवर्तन निदेशालय , आयकर विभाग , राजस्व गुप्तचर निदेशालय (DRI), राष्ट्रीय जांच एजेंसी और व्यय विभाग के साथ-साथ यह फाइल सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय गृह मंत्री की टेबल पर पहुंचने वाली है।
साफ है कि अब बच निकलने की कोई गली नहीं बची है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट और बेनामी संपत्ति अधिनियम के जो पेंच कसने वाले हैं, उसमें बड़े-बड़े सूरमाओं का दम घुटेगा। जो लोग अब तक खुद को 'स्मार्ट' समझकर दूसरों के नाम पर करोड़ों-अरबों की संपत्ति खड़ी कर रहे थे, उनके लिए यह स्पष्ट चेतावनी है।
कानून का शिकंजा अब कस चुका है और केंद्रीय एजेंसियों की धमक किसी भी दिन सुनाई दे सकती है। इसलिए, छत्तीसगढ़ में काले धन की 'पार्किंग' का जिम्मा उठाने वाले अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ जाएं, क्योंकि दिल्ली से जब हथौड़ा गिरेगा, तो ना 'पार्किंग' बचेगी और ना ही 'पार्क' करने वाले!
