तमनार में उद्योगों के लिए बिछाई गई बिसात में फंसी वर्दी: क्या पुलिस को जानबूझकर बनाया गया बलि का बकरा?

रायगढ़/तमनार। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का तमनार क्षेत्र इस वक्त सुलग रहा है। यहां कोयला खदान और सीमेंट फैक्ट्री के विस्तार को लेकर फैला असंतोष अब हिंसक मोड़ ले चुका है। जिस तरह से एक महिला आरक्षक के साथ बर्बरता हुई और उसे अर्धनग्न कर भीड़ के बीच घसीटा गया, उसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन उद्योगों को फायदा पहुंचाने के लिए जनता की आवाज दबा रहे हैं। यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि उन गलत फैसलों का नतीजा है जो बंद कमरों में लिए गए और जमीन पर थोप दिए गए।

कैसे सुलगती रही गुस्से की चिंगारी

तमनार में पिछले काफी समय से निजी उद्योगों के लिए जमीन लेने का काम चल रहा है। कागजों में इसे विकास का नाम दिया गया, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह विस्थापन और रोजी-रोटी का संकट बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आपत्तियों को फाइलों में दबा दिया गया और प्रशासन ने केवल उद्योगपतियों की बात सुनी। जब संवाद के सारे रास्ते बंद हो गए, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।

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जनसुनवाई या सिर्फ कागजी खानापूर्ति?
इस पूरे विवाद की जड़ में वह जनसुनवाई है, जिसे लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि रायगढ़ के अपर कलेक्टर अपुर्ण टोपो इस प्रक्रिया के केंद्र में थे। बताया जा रहा है कि वे एम्बुलेंस में बैठकर जनसुनवाई स्थल पहुंचे और जनता की बात सुनने के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों के साथ बैठक कर औपचारिकता पूरी कर ली। इसी फर्जीवाड़े के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

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महिला आरक्षक की बेबसी का वो खौफनाक वीडियो

घटना के दौरान एक महिला आरक्षक की जो हालत हुई, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। वायरल वीडियो में वह रोते हुए प्रदर्शनकारियों से कह रही है कि भाई मुझे छोड़ दो, माफ कर दो। लेकिन उग्र भीड़ ने उसकी एक न सुनी। उसके कपड़े फाड़ दिए गए और उसे लात-घूंसों से पीटा गया। यह सिर्फ एक पुलिसकर्मी की बेबसी नहीं थी, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की हार थी जिसने उसे पर्याप्त सुरक्षा के बिना आक्रोशित भीड़ के सामने झोंक दिया।

पुलिस की अब तक की कार्रवाई

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महिला आरक्षक के साथ हुई इस अमानवीय घटना के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाया और आरोपियों को उनके घरों से गिरफ्तार किया पुलिस  ने अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

 1.मंगल राठिया, निवासी आमगांव
 2. चिनेश खमारी, निवासी आमगांव
 3.प्रेमसिंह राठिया, निवासी आमगांव
 4.कीर्ति श्रीवास, निवासी आमगांव
 5.वनमाली राठिया, निवासी ग्राम झरना

पुलिस बाकी दो फरार आरोपियों की तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही है। इन पर जानलेवा हमला, बदसलूकी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

प्रशासन की विफलता पर खड़े होते तीखे सवाल

  • जब इलाके में इतना तनाव था, तो पर्याप्त पुलिस बल और बैरिकेडिंग क्यों नहीं की गई?
  • महिला पुलिसकर्मियों को बिना बैकअप के सबसे आगे फ्रंटलाइन पर क्यों भेजा गया?
  • क्या प्रशासन ने जानबूझकर पुलिस को जनता और उद्योग के बीच ढाल बना दिया ताकि असली मुद्दों से ध्यान हट जाए?
  • क्या सरकार अब जनता की सेवा करने के बजाय केवल कॉर्पोरेट घरानों की सुरक्षा एजेंसी बन गई है?

लेखक के विषय में

मनीशंकर पांडेय Picture

मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।

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