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बिलासपुर यूनिवर्सिटी: भ्रष्टाचार पर सरकार का बड़ा प्रहार, कुलसचिव सस्पेंड; जेम पोर्टल के जरिए चहेती फर्मों को उपकृत करने का आरोप
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (ABVU) में व्याप्त प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन कुलसचिव और वर्तमान उप-कुलसचिव डॉ. शैलेंद्र दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि डॉ. दुबे पर विश्वविद्यालय मद की राशि में हेराफेरी और जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से सामग्री खरीदी में गंभीर आर्थिक गड़बड़ियों के प्रमाण मिले हैं।
भंडार क्रय नियमों की अनदेखी और पसंदीदा फर्मों पर मेहरबानी का आरोप....
निलंबन आदेश के मुताबिक, डॉ. शैलेंद्र दुबे ने सामग्री क्रय के दौरान 'छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002' (संशोधित 2025) के संगत प्रावधानों का उल्लंघन किया है। आरोप है कि 15 अप्रैल 2025 को जेम पोर्टल के माध्यम से बिना किसी निविदा के L1 पद्धति का सहारा लेकर 1 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदी की गई।
हैरानी की बात यह है कि एक ही दिन में तीन विशिष्ट फर्मों—सागर इंडस्ट्रीज, सिंघानिया ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज और ओशन एंटरप्राइजेज (सभी जांजगीर स्थित)—को 26 क्रय आदेश जारी किए गए। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इन सभी फर्मों का स्वामित्व संभवतः एक ही परिवार के पास है, जिन्हें अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। इसके बाद 19 और 28 अप्रैल को भी इसी तरह के आदेश इन्हीं फर्मों को दिए गए थे।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस: मुख्य सचिव के निर्देश पर कार्रवाई
प्रदेश में जेम पोर्टल के माध्यम से हो रही खरीदी में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार बेहद संवेदनशील है। हाल ही में मुख्य सचिव विकास शील ने जेम खरीदी में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। डॉ. दुबे पर हुई यह कार्रवाई इसी मुहिम का हिस्सा मानी जा रही है। इससे पूर्व महासमुंद के राजीव लोचन पीजी कॉलेज की प्राचार्या समेत चार प्राध्यापकों को भी इसी तरह के मामलों में निलंबित किया जा चुका है।
नियुक्तियों में विवाद....
विश्वविद्यालय के छात्र लंबे समय से तत्कालीन कुलसचिव डॉ. दुबे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे थे। विवाद का एक अन्य मुख्य केंद्र कुलपति के निज सहायक उपेन चंद्राकर की नियुक्ति है। छात्रों का दावा है कि चंद्राकर का योग्यता प्रमाण पत्र राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से अनुमोदित नहीं है और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट भी इसे अमान्य करार दे चुका है। छात्रों ने इसे सीधे तौर पर 'मिलीभगत और भाई-भतीजावाद' का मामला बताया था। निलंबन की अवधि में डॉ. शैलेंद्र दुबे का मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय, उच्च शिक्षा विभाग, बिलासपुर संभाग निर्धारित किया गया है। आदेश में उल्लेख है कि: डॉ. दुबे का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत पाया गया है। उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। इस पूरे प्रकरण में विभागीय जांच की प्रक्रिया अलग से संचालित की जाएगी, जिससे अन्य दोषियों के नाम भी सामने आने की संभावना है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
