पूर्व मुख्य सचिव अमिताभ जैन को रिटायरमेंट के बाद सूचना आयोग की कमान, शपथ लेने की तैयारी के बीच पीएम मोदी तक पहुंची गंभीर शिकायत

पूर्व मुख्य सचिव अमिताभ जैन को रिटायरमेंट के बाद सूचना आयोग की कमान, शपथ लेने की तैयारी के बीच पीएम मोदी तक पहुंची गंभीर शिकायत

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव अमिताभ जैन के रिटायरमेंट के बाद अब उन्हें राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त (सीईसी) के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने जा रही है। खबर है कि सरकार ने उन्हें इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुन लिया है और वे जल्द ही इसकी शपथ लेने वाले हैं। हालांकि, उनकी इस नई पारी से पहले ही विवाद गहरा गया है। रायपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर इस नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

शपथ से पहले घोटालों की फाइलें पहुंचीं दिल्ली

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प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में एडवोकेट गुप्ता ने दावा किया है कि अमिताभ जैन के मुख्य सचिव रहते हुए छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल खेला। उन्होंने आरोप लगाया कि 3200 करोड़ रुपये के शराब घोटाले, कोयला लेवी, खनन और महादेव ऐप जैसे बड़े फर्जीवाड़ों की जानकारी होने के बाद भी जैन चुप रहे। पत्र में कहा गया है कि दागी रिकॉर्ड वाले अधिकारी को सूचना आयोग जैसे पारदर्शी संस्थान का मुखिया बनाना लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ होगा।

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जांच को दबाने और जासूसी कराने का सनसनीखेज आरोप

एडवोकेट गुप्ता ने अपने पत्र में एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने लिखा कि अमिताभ जैन ने अपने पद का रसूख दिखाकर केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED और आयकर विभाग) की राह में रोड़े अटकाए। आरोप है कि जांच के लिए आए केंद्रीय अफसरों की जासूसी कराई गई और डीओपीटी (DoP&T) द्वारा भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई के लिए भेजी गई फाइलों को उन्होंने दबा दिया।

सूचना आयोग को सुरक्षा कवच बनाने की तैयारी?

शिकायतकर्ता का कहना है कि अमिताभ जैन को सूचना आयोग का चेयरमैन बनाना महज संयोग नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि इस पद पर बैठने के बाद वे पुराने घोटालों से जुड़ी आरटीआई (RTI) याचिकाओं को रोकेंगे और भ्रष्टाचार के सबूतों को बाहर नहीं आने देंगे। गुप्ता ने पीएम मोदी से मांग की है कि जब तक इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र जांच नहीं हो जाती, उन्हें शपथ लेने से रोका जाए और किसी भी सरकारी पद पर उनकी नियुक्ति न की जाए।

पीएम को सौंपी गई शिकायतों के मुख्य बिंदु:

  •  DoP&T की जांच दबाना: केंद्रीय एजेंसियों द्वारा भेजी गई भ्रष्टाचार की रिपोर्टों को फाइलों में दफन करने का आरोप।
  •  शराब और कोयला घोटाला: मुख्य सचिव और शराब निगम के अध्यक्ष रहते हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधने का दावा।
  •  साक्ष्यों से छेड़छाड़: आशंका है कि पद पर रहते हुए उन्होंने पुराने सबूतों के साथ हेरफेर की है।
  •  जासूसी कांड: जांच के लिए आए आयकर और ईडी के अधिकारियों की निगरानी कराने का आरोप।

सबकी नजरें अब शपथ ग्रहण पर

नरेश चंद्र गुप्ता ने इस शिकायत की कॉपी गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजी है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली तक पहुंची इस शिकायत के बाद क्या अमिताभ जैन राज्य मुख्य सूचना आयुक्त पद की शपथ ले पाएंगे या इस नियुक्ति पर रोक लगेगी।

डिस्क्लेमर: यह समाचार प्राप्त दस्तावेजों और शिकायतकर्ता द्वारा प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की पुष्टि अभी किसी वैधानिक जांच एजेंसी द्वारा अंतिम रूप से नहीं की गई है। संबंधित पक्ष अपनी सफाई देने का अधिकार रखते हैं।

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