छत्तीसगढ़ में खत्म हुआ गार्ड ऑफ ऑनर का अंग्रेजों वाला नियम: अब मंत्रियों और बड़े पुलिस अफसरों को नहीं मिलेगी सलामी

छत्तीसगढ़ में खत्म हुआ गार्ड ऑफ ऑनर का अंग्रेजों वाला नियम: अब मंत्रियों और बड़े पुलिस अफसरों को नहीं मिलेगी सलामी

रायपुर। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में दशकों से चली आ रही गार्ड ऑफ ऑनर की परंपरा को बदल दिया है। अब मंत्रियों और पुलिस के बड़े अधिकारियों को उनके सामान्य दौरों या निरीक्षण के दौरान पुलिस की सलामी नहीं दी जाएगी। उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा की पहल पर गृह विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। इस फैसले के पीछे सरकार का तर्क है कि पुलिस के जवान फिजूल की औपचारिकताओं में समय बर्बाद करने के बजाय जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर ध्यान दें।


क्या बदला और क्या रहेगा पहले जैसा


गृहमंत्री विजय शर्मा ने खुद विभाग के अफसरों के साथ बैठक कर इस पुरानी व्यवस्था की समीक्षा की थी। उन्होंने साफ कहा कि पुलिस बल की ऊर्जा का सही इस्तेमाल होना चाहिए।
 
 इन मौकों पर नहीं मिलेगी सलामी: राज्य के भीतर किसी भी सामान्य दौरे, दौरे से आने-जाने या थानों के निरीक्षण के वक्त गृहमंत्री, अन्य सभी मंत्री और डीजीपी समेत किसी भी बड़े पुलिस अफसर को अब गार्ड ऑफ ऑॅनर नहीं दिया जाएगा।
  इनके लिए नियम नहीं बदला: राज्यपाल और राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे महानुभावों के लिए प्रोटोकॉल पहले जैसा ही रहेगा। उन्हें तय नियमों के मुताबिक सलामी दी जाती रहेगी।

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  त्योहारों और खास मौकों पर छूट 

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15 अगस्त, 26 जनवरी, शहीद दिवस और पुलिस परेड जैसे बड़े राष्ट्रीय और राजकीय कार्यक्रमों में यह पुरानी परंपरा जारी रहेगी।
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
अधिकारियों का कहना है कि जब भी कोई मंत्री या बड़ा अफसर किसी जिले में पहुंचता है, तो दर्जनों पुलिस जवानों को घंटों पहले से सलामी की तैयारी में जुटना पड़ता था। इससे थानों का कामकाज प्रभावित होता था। गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पुलिस को इन फालतू के कामों से आजाद करना जरूरी था ताकि वे अपने मूल काम यानी जनसेवा और अपराध रोकने पर फोकस कर सकें। यह कदम पुलिस के काम करने के तरीके को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

सूत्रों की मानें तो इस फैसले से निचले स्तर के पुलिस कर्मचारियों में काफी खुशी है, क्योंकि उन्हें अब वीआईपी दौरों के दौरान घंटों धूप में खड़े होकर सलामी का अभ्यास नहीं करना पड़ेगा। सरकार का यह फैसला साहब कल्चर को खत्म करने की दिशा में भी एक संदेश माना जा रहा है।

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