छत्तीसगढ़ के टीचर अब सिर्फ पढ़ाएंगे नहीं, बल्कि सांप-बिच्छू और आवारा कुत्तों से भी लड़ेंगे! DPI का नया आदेश

छत्तीसगढ़ के टीचर अब सिर्फ पढ़ाएंगे नहीं, बल्कि सांप-बिच्छू और आवारा कुत्तों से भी लड़ेंगे! DPI का नया आदेश

रायपुर: छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के शिक्षक अब सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे। शिक्षा विभाग (DPI) ने स्कूल परिसर में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक ऐसा आदेश जारी किया है, जिसने शिक्षकों की जिम्मेदारियों की सूची लंबी कर दी है। अब उनके कंधों पर सिर्फ बच्चों की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि आवारा कुत्तों, सांप और बिच्छू जैसी खतरनाक परिस्थितियों की निगरानी भी होगी।

DPI का आदेश — स्कूलों में “सुरक्षा गार्ड” की भूमिका शिक्षकों की!
DPI के आदेश के अनुसार शिक्षक सुनिश्चित करेंगे कि स्कूल परिसर में कोई जहरीला जीव प्रवेश न करे। आवारा कुत्तों को रोकने और ज़रूरत पड़ने पर नगर निगम या पंचायत के डॉग कैचर को सूचना देने की जिम्मेदारी भी उनके पास होगी। खेल के दौरान अगर कोई बच्चा तालाब, नदी या खुले क्षेत्र में चला जाए और हादसा हो, तो शिक्षक और प्राचार्य जिम्मेदार होंगे। स्कूल भवन जर्जर होने पर बच्चों को चोट लगने की स्थिति में भी शिक्षक जिम्मेदार ठहराए जाएंगे। इसके अलावा मध्याह्न भोजन, आधार आईडी, जाति प्रमाणपत्र, स्मार्ट कार्ड और SIR पोर्टल अपडेट जैसी प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ भी शिक्षक ही संभालेंगे।Ti-Trans_page-0001-724x1024

शिक्षक नाराज़ — पढ़ाई या ‘फील्ड वर्क’?
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि शिक्षकों की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए। पढ़ाने के अलावा पहले ही कई जिम्मेदारियाँ दी गई हैं। अब सांप-बिच्छू और कुत्तों से निपटने का आदेश न केवल अनावश्यक है, बल्कि हमारी सुरक्षा के लिए भी खतरा है। शिक्षक संगठनों का सवाल साफ है, क्या हम शिक्षा देंगे या ‘फील्ड वर्क’ करेंगे?

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सुप्रीम कोर्ट की पृष्ठभूमि
दरअसल, यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का पालन करने के लिए जारी किया गया है, जिसमें कहा गया था कि:

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  • स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस स्टैंड जैसे संवेदनशील स्थानों से आवारा कुत्तों को दूर रखा जाए।
  • ऐसे स्थानों पर बाउंड्री वॉल अनिवार्य हो।
  • पकड़े गए कुत्तों को शेल्टर हाउस में रखा जाए, उन्हें वहीं नहीं छोड़ा जाए।

क्या यह आदेश लागू होगा या पीछे हटेगा?
शिक्षकों की नाराज़गी बढ़ती जा रही है और सवाल उठ रहे हैं कि शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी, जब शिक्षक हर दिन गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त होंगे। अब सबकी नजरें DPI पर हैं कि क्या यह आदेश वापस लिया जाएगा या इसे लागू कर दिया जाएगा।

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