3 करोड़ की डिजिटल डोर नंबर प्लेट योजना का हाल: न आपातकालीन सेवाएं जुड़ीं, न मिल रहा शिकायतों का समाधान

3 करोड़ की डिजिटल डोर नंबर प्लेट योजना का हाल: न आपातकालीन सेवाएं जुड़ीं, न मिल रहा शिकायतों का समाधान

रायपुर ।रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड की महत्वाकांक्षी डिजिटल डोर नंबर प्लेट योजना अपने उद्देश्यों को पूरा करने में विफल साबित हो रही है। वर्ष 2022-23 में करोड़ों रुपये खर्च कर शहर के लगभग 3.15 लाख मकानों पर यूनिक क्यूआर कोड युक्त प्लेट्स तो लगा दी गईं, लेकिन प्रस्तावित 26 ई-गवर्नेस सेवाओं में से अधिकांश अब तक कागजों तक ही सीमित हैं। स्थिति यह है कि जिस तकनीक को आपात स्थिति में जीवनरक्षक बनना था, वह तकनीकी तालमेल की कमी के कारण धरातल पर नहीं उतर सकी है।

साढ़े तीन लाख घरों की डिजिटल पहचान पर खर्च हुए 3 करोड़

नगर निगम के अनुसार इस पूरी परियोजना पर कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड से लगभग 3 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। योजना का मुख्य लक्ष्य हर घर को एक डिजिटल पहचान देना था ताकि क्यूआर कोड स्कैन करते ही संपत्ति कर, जल कर, ऑनलाइन शिकायत, भवन अनुज्ञा और कर बकाया जैसी जानकारियां मिल सकें। सबसे महत्वपूर्ण पहलू आपातकालीन सेवाओं को इससे जोड़ना था, ताकि किसी भी अनहोनी के समय राहत दल सीधे सटीक लोकेशन पर पहुंच सके। डिजिटल प्लेट पर लगे क्यूआर कोड की कार्यप्रणाली को लेकर नागरिकों में असमंजस है। सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए नगर निगम ने इसे केवल मोर रायपुर ऐप से स्कैन करने तक सीमित रखा है। यदि कोई नागरिक सामान्य मोबाइल स्कैनर से इसे स्कैन करता है, तो उसे कोई जानकारी नहीं मिलती। ऐप में लॉगिन करने के बाद ही डेटा प्रदर्शित होता है। निगम का दावा है कि यह व्यवस्था डेटा सुरक्षा के लिए की गई है, परंतु व्यावहारिक स्तर पर यह प्रक्रिया जटिल साबित हो रही है।

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दो बार पत्राचार के बाद भी नतीजा शून्य

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योजना के शुरुआती खाके में डायल 112, 108 एंबुलेंस और अग्निशमन विभाग को इस सिस्टम से एकीकृत करना शामिल था। लक्ष्य था कि आपात स्थिति में कॉल करने वाले के मकान की सटीक जीपीएस लोकेशन संबंधित एजेंसी को तुरंत मिल जाए। तकनीकी जांच में सामने आया है कि एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) का इंटीग्रेशन नहीं हो पाने के कारण यह समन्वय नहीं हो सका। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के साथ पत्राचार के बावजूद तकनीकी बाधाएं दूर नहीं की जा सकीं।

सिस्टम की तकनीकी खामियों का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। रायपुरा निवासी श्री वर्मा ने बताया कि तीन दिन पूर्व उन्होंने प्रॉपर्टी टैक्स की जानकारी के लिए क्यूआर कोड स्कैन किया, लेकिन ऐप पर कोई डेटा नहीं दिखा। इसी तरह संतोषी नगर के आशीष साहू का कहना है कि क्यूआर स्कैन करने पर अपेक्षित विवरण नहीं मिलता, जिससे कर भुगतान में समस्या आ रही है। नागरिकों का आरोप है कि डेटा अपडेशन की कमी के कारण यह योजना केवल दिखावा बनकर रह गई है।

राजस्व में लाभ, सेवाओं में अभाव

योजना का एक सकारात्मक पक्ष केवल राजस्व संग्रह में दिखाई दिया है। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में डिजिटल डोर नंबर के क्यूआर कोड के माध्यम से लगभग 111 करोड़ रुपये का संपत्ति कर संग्रहित किया गया है। अधिकारियों का तर्क है कि इससे टैक्स विवरण और बकाया राशि देखने में आसानी हुई है, लेकिन नागरिक सेवाओं और आपातकालीन सुरक्षा के मोर्चे पर योजना अब भी विफल है।

डीजिटल नंबर प्लेट से आपातकालीन सेवाओं को जोड़ने के लिए डायल 112 और 108 के अधिकारियों के साथ पूर्व में बैठकें की गई थीं। तकनीकी कारणों से समन्वय में देरी हुई है। हम इस पर नए सिरे से कार्य शुरू कर रहे हैं ताकि नागरिकों को जल्द ही सभी सेवाओं का लाभ मिल सके।

विश्वदीप, आयुक्त, नगर निगम रायपुर

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