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जल संसाधन विभाग में फिर उइके की ताजपोशी की तैयारी, क्या याचिका वापस लेने के बदले मिला संविदा का लालच?
रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में इन दिनों ईएनसी इंद्रजीत उइके को दोबारा कुर्सी सौंपने की तैयारी और हाई कोर्ट की याचिका वापस लेने के बदले संविदा नियुक्ति के कथित सौदे को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। चर्चा है कि जून 2025 में रिटायर होने के बाद छह महीने की संविदा पा चुके उइके को फिर से ईएनसी बनाने की फाइल आगे बढ़ गई है, जबकि विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी ओर, ईएनसी के खिलाफ कोर्ट जाने वाले एक अफसर को मामला वापस लेने के बदले संविदा का लालच देने के आरोपों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पदोन्नति के लिए अयोग्य लेकिन संविदा के लिए खास
विभाग के भीतर चल रही सुगबुगाहट के अनुसार, ईएनसी के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले लगभग 60 अधिकारियों में से एक जेआर भगत ने अपना केस वापस ले लिया है। सूत्रों का दावा है कि भगत को आश्वासन दिया गया है कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें संविदा नियुक्ति दी जाएगी। हैरानी की बात यह है कि भगत को सेवा के दौरान पदोन्नति के लायक नहीं समझा गया, जिससे वे ईएनसी की रेस से बाहर रहे। अब वही अधिकारी संविदा के लिए योग्य कैसे हो गए, इसे लेकर विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
क्या विभाग में काबिल अफसरों का अकाल पड़ गया है?
इंद्रजीत उइके के मामले में सत्ता के गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सरकार एक ही चेहरे पर इतनी मेहरबान क्यों है। रिटायरमेंट के दिन उइके ने खुद ही मुख्य अभियंता दीपक भूम्मेरकर को प्रभार सौंपा था, लेकिन हफ्ते भर के भीतर ही वे संविदा पर लौट आए। अब उनका कार्यकाल खत्म होते ही उन्हें दोबारा कमान देने की तैयारी है। विभाग के बाकी अधिकारी दबी जुबान में पूछ रहे हैं कि क्या पूरी इंजीनियरिंग की कमान संभालने के लिए कोई दूसरा काबिल चेहरा नहीं बचा है।
कुर्सी के खेल में अफसरों का टूटता मनोबल
विभागीय जानकारों का कहना है कि अगर इसी तरह संविदा का खेल चलता रहा, तो सीनियर अफसरों का मनोबल टूटेगा और वे कभी ऊंचे पदों तक नहीं पहुंच पाएंगे। चर्चा है कि बड़े प्रोजेक्ट्स और पुराने अनुभवों का बहाना बनाकर चहेते अफसरों को कुर्सियों से चिपकाए रखने का नया रिकॉर्ड बनाया जा रहा है।
इस पूरे मामले पर फिलहाल जल संसाधन विभाग के किसी बड़े अधिकारी ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन फाइलों की रफ्तार बता रही है कि जल्द ही नई नियुक्तियों पर मुहर लग सकती है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
