रायपुर: जमीन की नकल के लिए अब नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर, 2 करोड़ से डिजिटल होंगे 100 साल पुराने रिकॉर्ड
रायपुर। रायपुर कलेक्टोरेट के रिकॉर्ड रूम में रखे 100 साल पुराने जमीनी दस्तावेज अब जल्द ही ऑनलाइन होने वाले हैं। आज के डिजिटल युग में भी जमीन के ये पुराने रिकॉर्ड कागजी फाइलों में ही रखे गए हैं। इस वजह से अपनी ही जमीन की एक नकल निकालने के लिए लोगों को कई-कई दिनों से लेकर हफ्तों तक कलेक्टोरेट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब लोगों की इस परेशानी को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने करीब दो करोड़ रुपये की एक योजना तैयार की है। इसके तहत पूरे रिकॉर्ड रूम के दस्तावेजों को ऑनलाइन किया जाएगा। प्रस्ताव जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।
रिकॉर्ड रूम से ही शुरू होती है आम आदमी की परेशानी
जमीन से जुड़े किसी भी पुराने रिकॉर्ड या मिसलबंद की जरूरत पड़ते ही लोगों की परेशानी सीधे कलेक्टोरेट के रिकॉर्ड रूम से शुरू हो जाती है। यहां सभी पुराने दस्तावेज अभी भी पूरी तरह से मैनुअल तरीके से रखे हुए हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी जमीन का पुराना रिकॉर्ड मांगता है, तो स्टाफ को हजारों फाइलों के बीच उस कागज को खोजना पड़ता है। मैनुअल व्यवस्था होने के कारण किसी एक पुराने मिसलबंद को तलाशने में ही कई बार पूरे दिन लग जाते हैं।
स्टाफ कम होने से फाइलें खोजने में लगता है समय
रिकॉर्ड रूम के अंदर वर्तमान समय से लेकर सौ साल पहले तक के जमीनी दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। एक तरफ रिकॉर्ड का अंबार है और दूसरी तरफ स्टाफ की कमी है। ऐसे में कर्मचारियों को हजारों पुरानी फाइलों के बीच से कोई आवश्यक रिकॉर्ड निकालने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। यही वजह है कि आम लोगों को एक साधारण दस्तावेज निकालने में ही एक से दो सप्ताह तक का लंबा इंतजार करना पड़ जाता है।
कोर्ट के मामलों और नामांतरण में होती है देरी
भूमि विवाद के मामलों में पुराने मिसलबंद की प्रमाणित प्रति बहुत जरूरी होती है। अगर सही समय पर ये दस्तावेज नहीं मिलते, तो न्यायालय में चल रही सुनवाई पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा, संपत्ति की खरीदी-बिक्री, नामांतरण और राजस्व विभाग से जुड़े अन्य मामलों में भी दस्तावेज समय पर न मिलने के कारण लोगों को बेवजह देरी का सामना करना पड़ता है।
शासन को भेजा जाएगा दो करोड़ का प्रस्ताव
इस पुरानी व्यवस्था को बदलने के लिए अब जिला प्रशासन ने तैयारी कर ली है। कलेक्टोरेट के सभी पुराने दस्तावेजों और मिसलबंद को डिजिटल करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। शासन को यह प्रस्ताव जल्द भेजा जाएगा, जिसमें करीब दो करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना है। शासन से मंजूरी मिलते ही दस्तावेजों की डिजिटल स्कैनिंग होगी और उन्हें ऑनलाइन उपलब्ध कराने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
रिकॉर्ड रूम में मौजूद सभी दस्तावेजों और मिसलबंद को पूरी तरह ऑनलाइन करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस काम में लगभग दो करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। शासन से इस योजना को मंजूरी मिलते ही प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
कीर्तिमान सिंह राठौर अपर कलेक्टर रायपुर
