Royal Challenge से McDowell’s तक बदल सकता है स्वाद! Diageo ने बदला फॉर्मूला, फ्लेवरिंग नियमों के बाद पूरे भारत में होगी नई व्यवस्था
नई दिल्ली। अगर आपकी पसंदीदा ड्रिंक की बोतल में वही पुराना नाम और पैकेजिंग हो, लेकिन स्वाद थोड़ा अलग महसूस हो तो इसकी वजह नया फॉर्मूला हो सकता है। शराब बनाने वाली कंपनी Diageo भारत में अपने कुछ चर्चित whisky और rum ब्रांड्स की निर्माण प्रक्रिया में बदलाव करने जा रही है। कंपनी का यह कदम फूड सेफ्टी नियमों से जुड़े विवाद के बाद सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, नियामकीय आपत्तियों के चलते कुछ राज्यों में कंपनी के चुनिंदा उत्पादों की बिक्री पर रोक लगी थी। अब कंपनी ने संबंधित फ्लेवरिंग नियमों का पालन करने के लिए फॉर्मूले में बदलाव पर सहमति जताई है।
किन ब्रांड्स पर पड़ा असर?
विवाद मुख्य रूप से कुछ राज्यों में निर्मित Diageo के चुनिंदा उत्पादों से जुड़ा है। इनमें प्रमुख रूप से
- Antiquity Blue Whisky
- Royal Challenge Whisky
- McDowell’s No. 1 Celebration Matured XXX Rum शामिल हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, Antiquity Blue और Royal Challenge के मध्य प्रदेश में बने उत्पाद तथा McDowell’s No. 1 Celebration Matured XXX Rum के महाराष्ट्र में बने बैच नियामकीय जांच के दायरे में आए थे।
असली विवाद फ्लेवरिंग को लेकर था
मामला शराब के स्वाद में इस्तेमाल किए जाने वाले फ्लेवरिंग सब्सटेंस को लेकर सामने आया। खाद्य नियामक की आपत्ति यह थी कि कुछ उत्पादों में इस्तेमाल की जा रही फ्लेवरिंग सामग्री लेबलिंग और निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं थी। यानी विवाद सिर्फ इस बात का नहीं था कि बोतल के अंदर क्या है, बल्कि यह भी था कि उसकी जानकारी उपभोक्ता को लेबल पर किस तरह दी जा रही है।
कंपनी अब क्या बदलने वाली है?
नियामकीय आपत्ति के बाद Diageo ने ऐसे फ्लेवरिंग तत्वों को हटाने या उनके इस्तेमाल की प्रक्रिया में बदलाव करने पर सहमति जताई है, जिन पर सवाल उठे थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बदलाव केवल उन राज्यों तक सीमित रहने के बजाय देशभर में लागू किए जाने की तैयारी है। इससे भविष्य में बाजार में आने वाले नए बैचों के फॉर्मूले में अंतर दिखाई दे सकता है।
क्या बदल जाएगा आपकी पसंदीदा whisky का स्वाद?
यही सवाल अब सबसे ज्यादा चर्चा में है। फॉर्मूले में फ्लेवरिंग से जुड़े बदलाव होने पर उत्पाद के स्वाद, खुशबू या overall flavour profile में कुछ अंतर आ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक को बदलाव तुरंत महसूस होगा। किसी पेय का अंतिम स्वाद कई चीजों पर निर्भर करता है और कंपनी किस अनुपात में नए ingredients इस्तेमाल करती है, इससे भी फर्क पड़ेगा। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि Royal Challenge, Antiquity Blue या McDowell’s का स्वाद निश्चित रूप से कितना बदल जाएगा।
नए फॉर्मूले तक पुराने स्टॉक का क्या?
बदलाव लागू होने के दौरान बाजार में पुराने फॉर्मूले वाले स्टॉक और नए मानकों के अनुरूप तैयार उत्पाद के बीच अंतर हो सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, संक्रमण अवधि में लेबलिंग को लेकर भी कंपनी को नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा। यदि किसी उत्पाद में फ्लेवरिंग का इस्तेमाल है तो उसकी जानकारी लेबल पर स्पष्ट रूप से देने की व्यवस्था लागू होगी।
Royal Challenge की बिक्री भी बड़ी वजह
Royal Challenge Diageo के भारत में महत्वपूर्ण whisky ब्रांड्स में शामिल है और इसकी बिक्री का पैमाना काफी बड़ा है। इसलिए इसके फॉर्मूले में बदलाव का असर सिर्फ कंपनी पर नहीं, बल्कि बाजार में उपलब्ध उत्पादों पर भी दिखाई दे सकता है। कंपनी के सामने चुनौती यह होगी कि नए नियामकीय मानकों का पालन भी हो और ग्राहकों के बीच ब्रांड का स्थापित स्वाद भी यथासंभव बरकरार रहे।
प्लास्टिक पैकेजिंग को लेकर भी कंपनी जांच के दायरे में
फ्लेवरिंग विवाद के अलावा Diageo के उत्पादों को लेकर पैकेजिंग से जुड़ी नियामकीय जांच भी सामने आई थी। रिपोर्टों में करीब 18,000 पेटियों को रोके जाने की बात कही गई थी। इसमें बोतलों में इस्तेमाल प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग संबंधी जानकारी या मार्किंग को लेकर आपत्ति का जिक्र था। इससे साफ है कि शराब कंपनियों पर अब सिर्फ उत्पाद की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि लेबलिंग, पैकेजिंग और उपभोक्ता को दी जाने वाली जानकारी को लेकर भी निगरानी बढ़ रही है।
ग्राहक के लिए सबसे बड़ा बदलाव क्या होगा?
फिलहाल, सबसे अहम बात यही है कि नाम वही रह सकता है, लेकिन बोतल के अंदर इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूले में बदलाव संभव है। नए बैच बाजार में आने के बाद ग्राहकों को लेबल पर भी ज्यादा स्पष्ट जानकारी देखने को मिल सकती है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नए फॉर्मूले वाले उत्पाद बाजार में कब पहुंचते हैं और क्या ग्राहकों को उनके पसंदीदा ब्रांड के स्वाद में वास्तव में कोई बड़ा फर्क महसूस होता है।
