अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी पर सियासत गरम: BJP ने बताया 'धर्मांतरण नेटवर्क' का किंगपिन, कांग्रेस ने सरकार पर लगाए माहौल बिगाड़ने के आरोप
रायपुर। भगवान शिव और अन्य हिंदू देवी-देवताओं को लेकर सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में छत्तीसगढ़ की राजनीति में घमासान तेज हो गया है। पुलिस द्वारा अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। पुलिस ने इस मामले में अरुण पन्नालाल और हंसराज गोयल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299 और 353(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। अब मामला केवल सोशल मीडिया पोस्ट और पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके तार धर्मांतरण और प्रदेश की राजनीति से जोड़कर देखे जाने लगे हैं।
भाजपा ने पहले थाने पहुंचकर की थी कार्रवाई की मांग
मामले में भाजपा नेताओं ने सिविल लाइंस थाने पहुंचकर डीसीपी तारकेश्वर पटेल को ज्ञापन सौंपा था। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी, विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक बृजेश पाण्डेय समेत अन्य नेताओं ने कथित सोशल मीडिया टिप्पणियों को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज किया और अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी की गई।
अजय चंद्राकर ने धर्मांतरण से जोड़ा मामला
अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी के बाद भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने मामले को एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे से जोड़ दिया। उन्होंने अरुण पन्नालाल को छत्तीसगढ़ में कथित धर्मांतरण नेटवर्क का "किंगपिन" बताते हुए पूरे मामले की विस्तृत जांच की मांग की। चंद्राकर ने यह भी सवाल उठाया कि कथित गतिविधियों के लिए फंडिंग कहां से आती है और क्या इसमें किसी प्रकार की विदेशी फंडिंग शामिल है। उन्होंने जांच एजेंसियों से वित्तीय स्रोतों की भी पड़ताल करने की मांग की। हालांकि, धर्मांतरण नेटवर्क और विदेशी फंडिंग से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच में ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।
कांग्रेस ने गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर साधा निशाना
दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों और गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठन धार्मिक मुद्दों के जरिए प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसी किसी भी कोशिश की निंदा करती है और सरकार को पूरे घटनाक्रम पर आत्ममंथन करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के नाम पर लोगों को उकसाने और कार्रवाई करने का माहौल बनाया जा रहा है।
कांग्रेस बोली- सभी धर्मों और विचारों का सम्मान जरूरी
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भारत सभी नागरिकों का देश है और यहां विभिन्न धर्मों, परंपराओं और संत-महात्माओं के सम्मान की परंपरा रही है। उन्होंने सरकार से अपील की कि धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े मामलों में कार्रवाई कानून के अनुसार होनी चाहिए और किसी भी पक्ष को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद अब सियासी मुद्दा
जिस विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर कथित धार्मिक टिप्पणियों से हुई थी, वह अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गया है।
भाजपा का रुख:
- कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर कड़ी कार्रवाई की मांग
- मामले की विस्तृत जांच
- कथित धर्मांतरण नेटवर्क की जांच
- फंडिंग के स्रोतों की पड़ताल
कांग्रेस का रुख:
- गिरफ्तारी और राजनीतिक बयानबाजी पर सवाल
- सरकार पर माहौल खराब करने का आरोप
- धार्मिक मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल का विरोध
अब जांच के नतीजों पर टिकी नजर
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद इस मामले में जांच आगे बढ़ रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसियों को कथित सोशल मीडिया पोस्ट, आरोपियों की भूमिका और धर्मांतरण से जुड़े लगाए जा रहे आरोपों के संबंध में क्या तथ्य मिलते हैं। इस बीच, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज होने से यह मामला आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।
