MCB स्कूल विवाद:रामगढ़ हाई स्कूल में बच्चो से झाड़ू लगवाने का मामला गर्माया, वायरल वीडियो ने खोली प्राचार्य की पोल, जांच के आदेश

MCB स्कूल विवाद:रामगढ़ हाई स्कूल में बच्चो से झाड़ू लगवाने का मामला गर्माया, वायरल वीडियो ने खोली प्राचार्य की पोल, जांच के आदेश

मनेंद्रगढ़: मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के भरतपुर विकासखंड स्थित रामगढ़ हाई स्कूल में बच्चों से झाड़ू लगवाने और कचरा साफ कराने का मामला अब बड़े विवाद का रूप ले चुका है। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, अभिभावकों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक में नाराज़गी फैल गई। प्राचार्य सत्तर सिंह लगातार आरोपों से पल्ला झाड़ रहे हैं, मगर वीडियो में सवालों से बचते उनके रवैये ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

शाला प्रबंधन समिति के विधायक प्रतिनिधि हीरालाल यादव ने घटना को “पूरी तरह गलत और निंदनीय” बताते हुए कहा कि स्कूल में साफ-सफाई के लिए सरकार अलग से बजट देती है। यदि स्कूल में प्यून की कमी है, तो किसी स्थानीय व्यक्ति को भुगतान कर सफाई कराना चाहिए, बच्चों को झाड़ू पकड़ाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं। बीजेपी मंडल अध्यक्ष प्रदीप सिंह ने भी मामले को गंभीर बताते हुए संस्था प्रमुख से जवाब-तलब की बात कही। उन्होंने साफ कहा कि “स्कूल में बच्चों से श्रम कराना न सिर्फ गलत, बल्कि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में संस्था को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा।”

शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष माधव सिंह ने प्राचार्य सत्तर सिंह पर सीधी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि स्कूल में सफाई के लिए फंड उपलब्ध होने के बावजूद बच्चों से काम करवाना “पूर्णतः अनुचित और नियमों के खिलाफ” है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को पहले ही निर्देश दिए गए थे कि बच्चों से किसी भी तरह का श्रम न कराया जाए, फिर भी घटना होना गंभीर चूक है।

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जिला शिक्षा अधिकारी आर. पी. मिरे ने भी स्पष्ट कहा कि बच्चों से झाड़ू लगवाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने याद दिलाया कि सभी स्कूलों में साफ-सफाई के लिए अंशकालिक कर्मचारी नियुक्त हैं। “यदि इसके बावजूद बच्चों से सफाई करवाई गई है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” डीईओ ने पूरे मामले की जांच विकासखंड शिक्षा अधिकारी को सौंप दी है।

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यह घटना ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करती है। सरकार भले ही शिक्षा सुधार में करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन ऐसी घटनाएँ जमीनी स्तर पर इन प्रयासों को कमज़ोर करती हैं। साथ ही, नई शिक्षा नीति में बच्चों से किसी भी तरह का शारीरिक श्रम कराना प्रतिबंधित है, फिर भी ऐसे मामले सामने आना शिक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

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