केवल केस निपटाना नहीं, महिलाओं को न्याय दिलाना है जरूरी: हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट को लगाई फटकार

केवल केस निपटाना नहीं, महिलाओं को न्याय दिलाना है जरूरी: हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट को लगाई फटकार

रायपुर। जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस संजय जायसवाल की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल मामलों को निपटाना ही फैमिली कोर्ट की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों को न्याय दिलाना अहम है।

महिला पक्षकारों को तुरंत कानूनी सहायता देना अनिवार्य
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर कोई पक्षकार, खासकर महिला या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति, वकील करने में असमर्थ हो तो फैमिली कोर्ट को तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराना होगा। सिर्फ यह कहना कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जाकर आवेदन करें, पर्याप्त नहीं है। मौखिक अनुरोध पर भी कोर्ट को मदद करनी चाहिए। हाईकोर्ट ने इस पर जोर दिया कि वकील न देने से संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होता है, जो जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार सुनिश्चित करता है।

मामला: जांजगीर-चांपा की फैमिली कोर्ट
जांजगीर-चांपा के फैमिली कोर्ट में तलाक का मामला लंबित था। पत्नी ने मौखिक रूप से कहा कि वह आर्थिक तंगी के कारण वकील नहीं कर सकती, और बार-बार पेशी के लिए जांजगीर नहीं आ सकती। फैमिली कोर्ट ने उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जाने की सलाह दी, और बाद में एक्स पार्टी तलाक की डिक्री पति के पक्ष में जारी कर दी। महिला ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की।

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हाईकोर्ट का आदेश: तलाक की दोबारा सुनवाई
हाईकोर्ट ने तलाक का फैसला रद्द करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई का आदेश दिया। न्यायालय ने कहा कि छत्तीसगढ़ फैमिली कोर्ट रूल्स 2007 के नियम 14 के तहत हर कोर्ट को वकीलों का एक पैनल रखना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल कानूनी सहायता प्रदान की जा सके।

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प्रदेश भर के फैमिली कोर्ट के लिए नई गाइडलाइन

  • हाईकोर्ट ने सभी फैमिली कोर्ट के लिए गाइडलाइन जारी की है:
  • प्रत्येक फैमिली कोर्ट को अपना वकीलों का पैनल बनाना होगा।
  • पक्षकारों को सिर्फ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नहीं भेजा जाएगा।
  • कोर्ट अपने पैनल के वकील द्वारा तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगा।
  • इन वकीलों की फीस राज्य सरकार के राजस्व से भुगतान की जाएगी।
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