IGKV पेपर लीक पर सरकार का सख्त रुख! CM साय बोले- परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की B.Sc. एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी (कीट विज्ञान) परीक्षा के प्रश्नपत्र के कथित लीक मामले ने अब शासन का ध्यान खींचा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने या विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कड़ी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पांच सदस्यीय कमेटी करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की तह तक पहुंचने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति प्रश्नपत्र लीक से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर रहेगा कि प्रश्नपत्र आखिर परीक्षा से पहले बाहर कैसे पहुंचा और इसमें किस स्तर पर लापरवाही या भूमिका रही। इसके साथ ही मामले में तेलीबांधा थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। पुलिस जांच के साथ साइबर सेल की मदद भी ली जा रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल पेपर की होगी जांच
जांच समिति सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रश्नपत्र और परीक्षा में इस्तेमाल किए गए मूल प्रश्नपत्र का मिलान करेगी। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि वायरल प्रश्नपत्र वास्तविक था या नहीं और यदि वह मूल प्रश्नपत्र से मेल खाता है तो वह सबसे पहले कहां से बाहर आया। जांच में मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे
- प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर निकला?
- इसे सोशल मीडिया तक किसने पहुंचाया?
- किन लोगों के बीच इसे साझा किया गया?
- प्रश्नपत्र कितने छात्रों या अन्य लोगों तक पहुंचा?
- परीक्षा प्रक्रिया में किस स्तर पर सुरक्षा चूक हुई?
साइबर सेल खंगालेगा डिजिटल कनेक्शन
मामले में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद साइबर सेल की भूमिका भी अहम हो गई है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी तथ्यों की मदद से प्रश्नपत्र के प्रसारण की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश करेगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि प्रश्नपत्र के वायरल होने की शुरुआत कहां से हुई और उसे आगे किन लोगों ने प्रसारित किया।
20 अगस्त को हुई थी परीक्षा
गौरतलब है कि IGKV की B.Sc. एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा 20 अगस्त को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में प्रदेश के 27 कृषि महाविद्यालयों के करीब 1,200 विद्यार्थी शामिल होने वाले थे। परीक्षा से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए प्रश्नपत्र प्रसारित होने की शिकायत सामने आई थी। शिकायत मिलने के बाद परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे और मामले की जांच शुरू की गई।
विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर सरकार सख्त
पेपर लीक जैसे मामलों का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ता है, जो महीनों की मेहनत के बाद परीक्षा देने पहुंचते हैं। ऐसे में सरकार ने जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब सभी की नजर जांच समिति और पुलिस-साइबर सेल की रिपोर्ट पर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र कहां से बाहर आया और इस पूरे मामले के पीछे कौन जिम्मेदार है।
