IGKV Paper Leak का बड़ा खुलासा: बंद लिफाफे के अंदर तक पहुंचा कैमरा, प्रोफेसर समेत 6 गिरफ्तार; 12 हजार में छात्रों ने खरीदा पेपर
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) की B.Sc. एग्रीकल्चर द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले WhatsApp पर प्रश्नपत्र वायरल होने के बाद शुरू हुई जांच में पुलिस ने दुर्ग के भारती कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए पांच अन्य आरोपी छात्र हैं, जिन्होंने कथित तौर पर 12-12 हजार रुपये देकर प्रश्नपत्र हासिल किया था। मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि कथित तौर पर प्रश्नपत्र को लिफाफा खोलकर बाहर नहीं निकाला गया, बल्कि एंडोस्कोपिक कैमरे की मदद से बंद लिफाफे के अंदर मौजूद पेपर की तस्वीरें हासिल की गईं।
बंद लिफाफे के अंदर से ऐसे निकली तस्वीर!
रायपुर क्राइम DCP स्मृतिक राजनाला के मुताबिक, जांच में प्रश्नपत्र लीक करने का तरीका सामने आया है। आरोप है कि बंद लिफाफे को खोले बिना ही उसके अंदर मौजूद प्रश्नपत्र को विशेष कैमरे से स्कैन किया गया। इसके बाद कथित तौर पर प्रश्नपत्र की तस्वीरें तैयार कर उन्हें आगे भेजा गया। परीक्षा शुरू होने से लगभग दो घंटे पहले यही सामग्री WhatsApp के जरिए प्रसारित हो गई। यानी जिस प्रश्नपत्र को परीक्षा शुरू होने तक सुरक्षित रखने की व्यवस्था थी, उसकी तस्वीर कथित तौर पर सीलबंद लिफाफे के बाहर रहते हुए ही हासिल कर ली गई।
प्रोफेसर पर मुख्य भूमिका का आरोप
पुलिस की जांच में दुर्ग स्थित भारती कॉलेज के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, प्रोफेसर कथित तौर पर प्रश्नपत्र तक पहुंच बनाने और उसे आगे उपलब्ध कराने की पूरी प्रक्रिया में शामिल था। इसके बाद पांच छात्रों ने पैसे देकर प्रश्नपत्र खरीदा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र तक पहुंच किस तरह बनी और इस पूरी प्रक्रिया में प्रोफेसर के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे ?
12-12 हजार रुपये देकर छात्रों ने खरीदा पेपर
जांच एजेंसी के मुताबिक, पांच छात्रों ने कथित तौर पर 12 हजार रुपये प्रति छात्र की रकम देकर लीक हुआ प्रश्नपत्र खरीदा था। पुलिस ने इन सभी को गिरफ्तार कर लिया है और अब उनके मोबाइल फोन, चैट और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच का अगला फोकस यह पता लगाना है कि इन छात्रों तक प्रश्नपत्र किस माध्यम से पहुंचा और क्या इसे आगे दूसरे विद्यार्थियों तक भी भेजा गया था।
परीक्षा से दो घंटे पहले WhatsApp पर वायरल हुआ था पेपर
घटना उस समय सामने आई जब परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र के WhatsApp पर वायरल होने की शिकायत मिली। परीक्षा केंद्र पर जब वास्तविक प्रश्नपत्र विद्यार्थियों को बांटा गया, तो वायरल पेपर से उसका मिलान किया गया। दोनों के बीच समानता सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई और जांच शुरू हुई।
अब पूरे नेटवर्क की तलाश
छह गिरफ्तारियों के बाद पुलिस की जांच अभी खत्म नहीं हुई है। अब अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि
- प्रश्नपत्र तक आरोपियों की पहुंच कैसे बनी?
- बंद लिफाफे की तस्वीर हासिल करने की व्यवस्था किसने की?
- एंडोस्कोपिक कैमरे का इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया?
- प्रश्नपत्र की तस्वीर सबसे पहले किसके पास पहुंची?
- WhatsApp पर इसे आगे किन लोगों ने प्रसारित किया?
- क्या इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हैं?
पुलिस को पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे और गिरफ्तारियों की संभावना है।
CM साय ने दिए थे कड़ी कार्रवाई के निर्देश
पेपर लीक की घटना को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी गंभीरता से लिया था। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने पर जोर देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। पुलिस और साइबर टीम भी मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है।
NSUI ने किया IGKV का घेराव
मामले को लेकर शुक्रवार को NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने IGKV का घेराव करते हुए पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। NSUI का कहना है कि परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र का बाहर आ जाना सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों की मेहनत और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर मामला है।
क्या है एंडोस्कोपिक कैमरा?
एंडोस्कोपिक कैमरा एक छोटा कैमरा होता है, जो सामान्य तौर पर मेडिकल जांच में शरीर के अंदर के हिस्सों को देखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह कैमरा एक पतली ट्यूब के साथ जुड़ा होता है और सीमित जगहों के अंदर की तस्वीर लेने में सक्षम होता है। IGKV मामले में पुलिस का दावा है कि इसी तरह के कैमरे का इस्तेमाल कथित तौर पर बंद लिफाफे के अंदर मौजूद प्रश्नपत्र की तस्वीर हासिल करने के लिए किया गया।
छह गिरफ्तारियों के बाद कई सवाल बाकी
पुलिस की कार्रवाई से मामले में एक अहम कड़ी सामने आई है, लेकिन अभी कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। खासतौर पर प्रश्नपत्र तक पहली पहुंच किसकी थी और इसे परीक्षा केंद्र से बाहर निकालने की पूरी योजना में और कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी जांच जारी है। फिलहाल प्रोफेसर समेत छह आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और जांच एजेंसियां कथित पेपर लीक नेटवर्क की बाकी कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
