पेड़ के नीचे पढ़ाई को मजबूर सरकारी स्कूल के बच्चे, 3 साल से जर्जर भवन का इंतजार; अब ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
धमधा। दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की एक तस्वीर सामने आई है, जो कई सवाल खड़े करती है। खैरझिटी गांव के शासकीय प्राथमिक स्कूल के बच्चे अब कक्षा में नहीं, बल्कि पेड़ की छांव में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल का भवन लंबे समय से जर्जर है और सुरक्षित भवन की मांग पिछले करीब तीन वर्षों से उठाई जा रही है। जर्जर इमारत के चलते पहले बच्चों की पढ़ाई पंचायत भवन में कराई जा रही थी, लेकिन अब वहां भी व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चों को खुले में पढ़ाना पड़ रहा है।
तीन साल से पंचायत भवन में चल रही थी पढ़ाई
ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल की पुरानी इमारत की हालत काफी समय से खराब है। भवन को बच्चों के लिए असुरक्षित मानते हुए करीब तीन वर्षों से स्कूल की पढ़ाई पंचायत भवन में संचालित की जा रही थी। इस दौरान ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन से पुराने भवन को हटाकर नया स्कूल भवन बनाने की मांग की। आवेदन दिए गए, अधिकारियों से मुलाकात हुई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला।
17 अगस्त को पेड़ बना बच्चों की ‘कक्षा’
जब स्कूल भवन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो 17 अगस्त को बच्चे पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करते नजर आए। एक तरफ शिक्षक बच्चों को पढ़ाने की कोशिश करते रहे, वहीं दूसरी ओर खुले आसमान के नीचे बैठी बच्चों की तस्वीर सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में बच्चे हैं, शिक्षक हैं और पढ़ने की इच्छा भी है, लेकिन सुरक्षित छत नहीं है।
15 अगस्त से ग्रामीणों ने शुरू किया आंदोलन
स्कूल भवन की मांग को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा अब आंदोलन में बदल गया है। ग्रामीणों ने 15 अगस्त को ब्लॉक मुख्यालय पहुंचकर तिरंगा फहराया और इसके बाद आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया। किसान बंधु संगठन और ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई जैसे जरूरी मुद्दे पर वर्षों तक सिर्फ आश्वासन देना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि अब उन्हें कागजों में प्रस्ताव या मौखिक भरोसा नहीं, बल्कि स्कूल भवन का वास्तविक निर्माण चाहिए।
‘जर्जर भवन की जानकारी पहले से थी तो कार्रवाई क्यों नहीं?’
ग्रामीणों ने प्रशासन से सीधा सवाल किया है कि जब स्कूल भवन की खराब स्थिति की जानकारी अधिकारियों को लंबे समय से थी, तो नया भवन स्वीकृत कराने में तीन साल क्यों लग गए? ग्रामीणों का कहना है कि बारिश और मौसम की मार के बीच बच्चों को खुले में बैठाकर पढ़ाना किसी भी लिहाज से उचित व्यवस्था नहीं है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही का असर सीधे बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
प्रशासन ने दिया एक-दो दिन में मंजूरी का भरोसा
विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी ग्रामीणों से बातचीत के लिए पहुंचे। धमधा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अथर्व शर्मा के अनुसार, कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर खैरझिटी के पालक-किसानों को नए स्कूल भवन की स्वीकृति जल्द दिए जाने का आश्वासन दिया गया है। अधिकारी के मुताबिक प्रशासन की ओर से एक दिन के भीतर स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही गई है।
ग्रामीण बोले- अब आश्वासन नहीं, काम चाहिए
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पहले भी कई बार इसी तरह के आश्वासन मिल चुके हैं। तीन वर्षों में आवेदन और आंदोलन के बावजूद समस्या जस की तस बनी रही। अब ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक स्कूल भवन का काम जमीन पर शुरू नहीं होता, वे इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाते रहेंगे। इस दौरान किसान नेता बाबा टेक सिंह चंदेल, मोती राम वर्मा, पूर्व सरपंच केवल वर्मा, अनिल वर्मा, डोमार वर्मा, अमेलाल वर्मा, नकुल उमरे, चिंता वर्मा, संतोष साहू, गंगू वर्मा समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान बंधु संगठन के सदस्य मौजूद रहे।
बच्चों की पढ़ाई और प्रशासन के दावे के बीच अब असली परीक्षा
फिलहाल, प्रशासन ने नए भवन की स्वीकृति का भरोसा दिया है। लेकिन ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ एक और घोषणा नहीं है। तीन साल के इंतजार के बाद अब उनकी नजर इस बात पर है कि स्वीकृति के बाद निर्माण कब शुरू होता है। पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते बच्चों की तस्वीर ने सवाल तो खड़ा कर दिया है, अब जवाब प्रशासन को जमीन पर स्कूल भवन बनाकर देना होगा।
