डीईओ मनीराम यादव पर 'विशेष कृपा': 6 साल से फाइलें खा रहीं धूल, गबन के 'मास्टर' पर मेहरबान सिस्टम!
अंबिकापुर। सरकारी सिस्टम में 'प्रतिभा' की कद्र हो न हो, लेकिन घोटालों की निरंतरता बनाए रखने वाले अफसरों पर मेहरबानी कूट-कूटकर भरी होती है। बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) मनीराम यादव इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। 4.51 करोड़ रुपये के ताजा खरीदी घोटाले में फंसने वाले यादव जी का इतिहास भी बड़ा 'गौरवशाली' रहा है। वे लुण्ड्रा में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) रहते हुए 2.42 करोड़ रुपये के मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) घोटाले के मुख्य सूत्रधार रह चुके हैं। जांच में दोषी साबित होने और सरगुजा कलेक्टर की स्पष्ट सिफारिश के बावजूद बीते 6 सालों से साहब पर एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं हो सकी है।
बिना अनुमति खुलवाए 8 बैंक खाते, कैश बुक से हिसाब गायब
कलेक्टर रितु सिन्हा की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2012 से मार्च 2014 के बीच अंबिकापुर जिला कोषालय से 1.67 करोड़ रुपये की राशि निकाली गई, लेकिन इसे शासकीय रोकड़ बही (कैश बुक) में दर्ज तक नहीं किया गया। गबन के खेल को अंजाम देने के लिए वित्त विभाग की अनुमति के बिना ही 8 अलग-अलग बैंकों (जिनमें निजी बैंक भी शामिल थे) में खाते खुलवाए गए। कोषालय से निकला पैसा इन खातों में जमा हुआ और वहीं से चुपचाप गोल कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि अक्टूबर 2013 में प्रभार सौंपने के बाद भी यादव जी का 'आकर्षण' सरकारी खजाने से खत्म नहीं हुआ और नवंबर-दिसंबर में करीब 5.53 लाख रुपये का अवैध भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं, रघुनाथपुर ग्राम पंचायत से वापस मिले 70.70 क्विंटल बोरा चावल की स्टॉक एंट्री तक गायब कर दी गई।
जिन 8 बैंकों में जमा कराई गई राशि:
* IDBI बैंक, अंबिकापुर: ₹4,31,626.00
* HDFC बैंक, अंबिकापुर: ₹3,29,67,894.87
* सरगुजा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, गोधनपुर: ₹21,74,828.00
* सरगुजा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, रघुनाथपुर: ₹5,46,081.00
* सरगुजा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लमगांव: ₹24,63,517.00
* सरगुजा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, परसा: ₹0.00
* सरगुजा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, बरगिडीह: ₹1,67,75,952.00
* सेंट्रल बैंक, उदारी: (जांच का विषय)
जशपुर में पेंशन घोटाला, फिर भी कुर्सी सुरक्षित
मनीराम यादव की 'सेवाएं' केवल मिड-डे मील तक सीमित नहीं रहीं। जशपुर में बीईओ रहते हुए वे पेंशन घोटाले में भी दोषी पाए गए। जशपुर कलेक्टर और डीईओ की जांच रिपोर्ट में यादव को स्पष्ट रूप से दोषी ठहराया गया है। सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा के अनुसार, रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन कागजों का वजन इतना बढ़ गया है कि कार्रवाई की फाइल आगे खिसक ही नहीं पा रही।
मंत्री बोले- हटाएंगे, पर सिस्टम का जवाब- अभी रुकिए!
मामला गरमाने पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कड़ा रुख अपनाते हुए डीईओ यादव को हटाने की रायपुर तक अनुशंसा की थी। वहीं प्रभारी मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने भी 'सुशासन की सरकार' का हवाला देते हुए कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। हालांकि, मंत्रियों के बयानों और धरातल की कार्रवाई के बीच जो सुरक्षा कवच खड़ा है, उसे भेद पाना फिलहाल मंत्रियों के बस का भी नजर नहीं आ रहा।
कलेक्टर-कमिश्नर की रिपोर्ट पर कार्रवाई 'शून्य'
हाल ही में बलरामपुर कलेक्टर चंदन त्रिपाठी और सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा ने 4.51 करोड़ के जेम (GeM) पोर्टल खरीदी घोटाले की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी है। इसमें स्पष्ट दर्ज है कि डीईओ ने बिना क्रय समिति बनाए और बिना भौतिक सत्यापन किए करोड़ों के फर्जी बिल पास किए।
मामला बहुत पुराना है, मैं ज्यादा कुछ नहीं बोलूंगा। जांच रिपोर्ट कमिश्नर से प्राप्त कर लीजिए।
मनीराम यादव, डीईओ, बलरामपुर
