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छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र बॉर्डर पर बाघ का खौफ: खेत में काम कर रहे ग्रामीणों को दौड़ाया, पेड़ पर चढ़कर बची जान
मोहला-मानपुर। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमा से लगे जंगलों में एक बार फिर बाघ की दहशत फैल गई है। पिछले करीब एक महीने से इलाके में सक्रिय बाघ ने ग्रामीणों और पशुधन को लगातार निशाना बनाकर दहशत का माहौल बना दिया है। ताजा घटना औंधी तहसील के बागडोंगरी ग्राम पंचायत क्षेत्र की है, जहां 6 मार्च को बाघ ने दिनदहाड़े मवेशी पर हमला कर दिया।
बताया जा रहा है कि मानपुर दक्षिण वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गांव के एक ग्रामीण का बैल आसपास के इलाके में चर रहा था। तभी घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उस पर हमला कर दिया। किसी तरह बैल बाघ के चंगुल से निकलकर अपने मालिक के घर पहुंचा, जहां उसके शरीर पर बाघ के पंजों के गहरे निशान और गर्दन पर दांतों के घाव देखे गए।
ग्रामीणों का पीछा कर पेड़ तक पहुंचा बाघ
बाघ की दहशत यहीं नहीं थमी। उसी दिन बागडोंगरी पंचायत के आश्रित गांव मरकाटोला में भी बाघ दिखाई दिया। खेतों में मक्का की फसल की रखवाली कर रहे दो ग्रामीणों पर बाघ ने अचानक हमला करने की कोशिश की। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि दोनों ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए पास के एक पेड़ पर चढ़ गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाघ लंबे समय तक उसी पेड़ के आसपास मंडराता रहा और ऊपर बैठे ग्रामीणों पर हमला करने की फिराक में था। इसी दौरान गांव के अन्य लोगों को घटना की जानकारी मिली। ग्रामीण टॉर्च लेकर समूह में मौके पर पहुंचे। लोगों की आवाज और तेज रोशनी से घबराकर बाघ जंगल की ओर भाग गया, तब जाकर पेड़ पर फंसे ग्रामीण सुरक्षित नीचे उतर सके।
महुआ संग्रहण पर भी पड़ा असर
इलाके में बाघ की लगातार मौजूदगी के कारण ग्रामीणों में भारी दहशत है। इस समय जंगलों में महुआ संग्रहण का सीजन चल रहा है, जो ग्रामीणों की आय का प्रमुख स्रोत माना जाता है। लेकिन बाघ के डर से लोग जंगल जाने से कतरा रहे हैं। इससे न सिर्फ उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है, बल्कि रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी असर पड़ रहा है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि कई बच्चे रोजाना जंगल के रास्ते से स्कूल जाते हैं। ऐसे में बाघ की गतिविधियों ने अभिभावकों की चिंता और बढ़ा दी है। वन विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
एक महीने में कई हमले
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह बाघ पिछले करीब डेढ़ महीने से इलाके में लगातार सक्रिय है और अलग-अलग गांवों में दिखाई दे रहा है। 12 फरवरी को सबसे पहले गहनगट्टा गांव में उसने एक मवेशी को अपना शिकार बनाया था। इसके बाद सीमावर्ती महाराष्ट्र के केहकावाही गांव में एक ग्रामीण की जान चली गई, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। घटना के अगले ही दिन बाघ फिर छत्तीसगढ़ की सीमा में दाखिल हुआ और पीटेमेटा गांव में एक और मवेशी को मार डाला।
अब ताजा मामला बागडोंगरी क्षेत्र का सामने आया है, जहां बाघ की मौजूदगी से गांवों में भय का माहौल है। लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द कार्रवाई करते हुए बाघ को पकड़ने या उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में स्थानांतरित करने की मांग की है, ताकि लोगों और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
