CG बोर्ड की आड़ में CBSE का 'फर्जीवाड़ा': मान्यता राज्य की, वसूली 10 हजार की किताबों से; प्रदेश के 1700 निजी स्कूलों ने खोली शिक्षा विभाग की पोल

CG बोर्ड की आड़ में CBSE का 'फर्जीवाड़ा': मान्यता राज्य की, वसूली 10 हजार की किताबों से; प्रदेश के 1700 निजी स्कूलों ने खोली शिक्षा विभाग की पोल

रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर खुली लूट मची है। स्कूल के बोर्ड पर मान्यता 'छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल' (CG Board) की लिखी है, लेकिन क्लासरूम के अंदर पैरेंट्स को 'CBSE पैटर्न' का झांसा देकर मोटी फीस वसूली जा रही है। हद तो यह है कि इन स्कूलों ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की किताबें तक नहीं उठाई हैं।

इसकी जगह बच्चों को 8 से 10 हजार रुपए की निजी प्रकाशकों (Private Publishers) की किताबें खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। मामले की गंभीरता और खुलेआम चल रही इस ठगी को देखते हुए छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन ने अब सीधे शिक्षा सचिव से इस 'फर्जीवाड़े' की शिकायत की है।

1700 स्कूलों ने दिखाई विभाग को ठेंगा

आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में करीब 6800 निजी स्कूल हैं। इनमें से 6100 स्कूल सीजी बोर्ड (हिंदी-अंग्रेजी माध्यम) से संबद्ध हैं। जबकि CBSE के सिर्फ 520 और ICSE के 24 स्कूल हैं। नियम के मुताबिक सीजी बोर्ड के स्कूलों को SCERT की किताबें पढ़ानी हैं। लेकिन शिक्षा विभाग के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए इस सत्र में 1700 से ज्यादा स्कूलों ने सरकारी किताबें उठाई ही नहीं। बड़ा सवाल यह है कि बिना सरकारी किताबों के ये स्कूल कैसे चल रहे हैं? जवाब साफ है- यहां निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें चलाकर भारी कमीशन का खेल चल रहा है।

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डीपीआई के आदेश हवा में, पालकों की जेब पर डाका

लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) का साफ आदेश है कि सीजी बोर्ड के स्कूलों में SCERT और CBSE स्कूलों में NCERT की ही किताबें चलेंगी। लेकिन निजी स्कूलों के संचालक इस नियम को रद्दी की टोकरी में डाल चुके हैं। पैरेंट्स एसोसिएशन का सीधा आरोप है कि पालकों और बच्चों को पूरी तरह से धोखे में रखा जा रहा है। बार-बार शिकायत के बाद भी शिक्षा विभाग के अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं। इसी मिलीभगत का फायदा उठाकर स्कूल प्रबंधन 8,000 से 10,000 रुपए का बुक-सेट बेचकर पालकों की जेब काट रहे हैं।

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बिलासपुर-रायपुर सबसे आगे, देखें कहां कितने स्कूलों ने नहीं ली किताबें

सरकारी किताबों का बहिष्कार कर निजी पब्लिशर्स को फायदा पहुंचाने में बिलासपुर, दुर्ग और रायपुर जैसे बड़े जिलों के स्कूल सबसे आगे हैं। 1700 स्कूलों की इस लिस्ट में जिलों का हाल कुछ इस तरह है:

  बिलासपुर: 157 स्कूल
 दुर्ग: 135 स्कूल
  रायपुर: 107 स्कूल
 जांजगीर-चांपा व सूरजपुर: 106-106 स्कूल
 कोरबा व सक्ती: 89-89 स्कूल
  सरगुजा: 85 स्कूल
 मुंगेली: 74, रायगढ़: 73, जशपुर: 72 स्कूल

इसके अलावा महासमुंद 66, राजनांदगांव 51, कांकेर 47, सारंगढ़-बिलाईगढ़ 45, बेमेतरा 43, बलौदाबाजार 43, एमसीबी 42, बस्तर 40, बलरामपुर 39, बालोद 36, कवर्धा 36, धमतरी 31, कोरिया 30, गरियाबंद 25, जीपीएम 23, कोंडागांव 17, खैरागढ़ 15, मोहला-मानपुर 12, बीजापुर 7, नारायणपुर 6 और सुकमा के 4 स्कूल भी इस लिस्ट में शामिल हैं।)

कमीशन के खेल पर विभाग की चुप्पी 

निजी प्रकाशकों की किताबें चलाने के पीछे सीधा गणित तगड़े कमीशन का है। स्कूल प्रबंधन उसी पब्लिशर की किताब कोर्स में लगाता है, जो सबसे ज्यादा कट (Cut) देता है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग की भूमिका पर है। जब 1700 स्कूलों ने किताबें ही नहीं लीं, तो विभाग ने उनसे जवाब-तलब क्यों नहीं किया?

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