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दागी अफसरों पर विभाग की भारी मेहरबानी ईओडब्ल्यू जांच के बावजूद लगातार मिल रहा प्रमोशन
रायपुर। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग में दागी अफसरों के अच्छे दिन चल रहे हैं। जिन अफसरों पर ईओडब्ल्यू और लोक आयोग में भ्रष्टाचार के गंभीर मामले दर्ज हैं उन्हें सजा मिलने के बजाय सरकार लगातार प्रमोशन का इनाम बांट रही है। साल 2006 और 2007 के बीच हुए घोटालों में फंसे केके कटारे और हरिओम शर्मा पर जांच की तलवार लटक रही है लेकिन सिस्टम की ऐसी कृपा है कि दोनों बड़े पदों पर बैठकर मलाई काट रहे हैं। दोनों अफसरों को इस जांच के दौरान ही दो दो बार पदोन्नति दे दी गई।
घोटाले की कहानी भी काफी दिलचस्प है। रायपुर जिले के कसडोल इलाके के अमरुवा रिकोकला गांव में 18 लाख रुपए की सड़क बननी थी। यहां बोगस बिल लगाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। शिकायत हुई तो ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज कर ली और तत्कालीन कार्यपालन अभियंता केके कटारे व सहायक अभियंता हरिओम शर्मा को आरोपी बना दिया। मजे की बात यह है कि कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में पता चला कि काम सिर्फ चार लाख अड़सठ हजार रुपए का हुआ था और बाकी रकम बिना काम के ही निकाल ली गई। इतने शानदार कारनामे के बाद भी इन अफसरों का बाल बांका नहीं हुआ।
सिस्टम से खेलने का एक और बड़ा खेला हरिओम शर्मा ने किया है। इस मामले से परेशान होकर रिटायर्ड कार्यपालन अभियंता प्रकाशमणी साहू ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर शिकायत की है। उन्होंने बताया है कि 16 साल पहले हरिओम शर्मा ने 92 लाख रुपए एडवांस निकाल लिए थे। यह भारी भरकम रकम आज तक कैश बुक में जमा नहीं हुई। इस गबन के बावजूद जुगाड़ और जोड़तोड़ के दम पर शर्मा उप अभियंता से मुख्य अभियंता की कुर्सी तक पहुंच गए।
ईओडब्ल्यू के निदेशक अमरेश कुमार मिश्रा ने इन दोनों अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए कई बार अनुमति मांगी। अदालत और पंचायत विभाग को भी पूरी जानकारी भेजी गई। लोक आयोग ने भी कटारे से उनकी और उनके परिवार की संपत्तियों का हिसाब मांगा है। विभाग के अवर सचिव ने भी जवाब के लिए कई बार पत्र लिखे लेकिन फाइलें बस एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रहीं।
इस पूरे मामले पर प्रमुख अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा केके कटारे ने बताया कि प्रकरण की जांच विभाग की कई इकाइयों द्वारा हो चुकी है और जिस सड़क के निर्माण की जांच कराने के लिए ईओडब्ल्यू ने लिखा है उस पर चार बार सड़क बन चुकी है।
कुल मिलाकर मामला यह है कि सड़क बने या न बने फाइलें दबनी चाहिए और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच दागी अफसरों का प्रमोशन होते रहना चाहिए। प्रशासन का यह रवैया आम जनता के पैसों की खुली लूट पर सिस्टम की मौन सहमति को दिखाता है।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
