जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार: रायगढ़ समेत छत्तीसगढ़ के 3 जिलों की केंद्रीय टीम करेगी जांच
रायगढ़। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन में लागत में बेतहाशा वृद्धि और लक्ष्य प्राप्ति में देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई गांवों में तो घटिया गुणवत्ता वाले काम की शिकायतें मिली हैं, जिसके बाद केंद्र सरकार हरकत में आ गई है। पूरे देश के 159 जिलों में जांच के आदेश दिए गए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के रायगढ़, बेमेतरा और जांजगीर-चांपा भी शामिल हैं। जल्द ही केंद्रीय टीम इन जिलों में पहुंचकर JJM के कार्यों की पड़ताल करेगी।
इसके लिए 148 केंद्रीय नोडल अधिकारी तैनात किए है। छत्तीसगढ़ के तीन जिले रायगढ़, बेमेतरा और जांजगीर-चांपा जिला केंद्र सरकार की रडार में है। टीम में केंद्रीय नोडल अधिकारी, राज्य और जिला स्तर के तकनीकी अधिकारी, भूजल वैज्ञानिक और इंजीनियर रहेंगे। टीम के साथ जल शक्ति मंत्रालय का एक अधिकारी भी होगा। जिलों में हुए क्रियान्वयन को लेकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। दरअसल कुछ स्थानों पर जल जीवन मिशन के कामों की लागत में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। इसीलिए जल जीवन मिशन के कामों की ऑडिट कराने का फैसला लिया है।
बताया जा रहा है कि रायगढ़ के सलिहारी और बरकाचार में सिंगल विलेज वाटर सप्लाई स्कीम की जांच केंद्रीय टीम करेगी। देश भर के 159 जिलों में जल जीवन मिशन का भ्रष्टाचार अधिक है। जांच के दायरे में छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा, रायगढ़ और बेेमेतरा के 6 गांव शामिल हैं। केंद्र सरकार ने इसके लिए 148 केंद्रीय नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। केंद्र सरकार ने जांच के संबंध में 14 मई को छग शासन को पत्र भेजा था। छग के तीन जिलों की जांच के लिए कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के डायरेक्टर अमित कुमार अग्रवाल को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
रायगढ़ जिले में JJM की स्थिति बदहाल बताई जा रही है, जहां ऐसे ठेकेदारों को काम दे दिया गया है जिन्हें इस तरह के काम का कोई अनुभव नहीं था। कई ठेकेदारों ने तो काम सबलेट कर दिया। स्थिति यह है कि कई जगहों पर पानी की टंकी अधूरी है, तो कहीं जलस्रोत न होने के बावजूद टंकी बना दी गई है, जिससे यह व्यर्थ हो गई है। जिले में करीब 50 फीसदी से ज़्यादा काम अधूरे पड़े हैं, और कई ठेकेदार पाइपलाइन बिछाने के बाद काम छोड़कर गायब हो गए हैं। केंद्रीय नोडल अधिकारी कार्यस्थल पर जाकर पीएचई के जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा कराए गए कामों की गहन पड़ताल करेंगे। वे यह सत्यापित करेंगे कि योजना पूरी हुई है या नहीं, साथ ही योजना के लाभार्थियों से सीधे बातचीत कर जमीनी हकीकत जानेंगे। इसके अतिरिक्त, वित्तीय समीक्षा भी की जाएगी ताकि गड़बड़ियों का पता लगाया जा सके।
