आम लोगों को पानी जांचने की सुविधा के लिए करना होगा इंतजार, पांच संभागों में लैब का टेंडर अटका
रायपुर। प्रदेश के शहरी इलाकों और कस्बों में लोगों को पीने के पानी की गुणवत्ता जांचने की सुविधा के लिए अभी कुछ और समय तक इंतजार करना होगा। नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से आम नागरिकों के लिए पहली बार पांच संभागीय मुख्यालयों में वाटर टेस्टिंग लैब स्थापित करने की योजना टेंडर की प्रक्रिया में उलझ गई है। विभाग ने इस प्रोजेक्ट को मूर्तरूप देने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया था, लेकिन किसी भी एजेंसी ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। इस स्थिति के बाद अब विभाग टेंडर की शर्तों में बदलाव करते हुए नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है।
इस योजना पर नौ करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च की जानी है। इसके तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर और अंबिकापुर में लैब तैयार की जाएंगी। इन लैब के शुरू होने के बाद आम लोग खुद ही अपने घरों में सप्लाई होने वाले पानी का सैंपल देकर उसकी गुणवत्ता की जांच करवा सकेंगे।
शर्तों में यह किया जा रहा है बदलाव
पहले जारी किए गए टेंडर में एजेंसियों के शामिल न होने का बड़ा कारण एक ही कंपनी पर पूरी जिम्मेदारी डालना था। शुरुआत में लैब का ढांचा तैयार करने, मशीनें लगाने, कर्मचारी उपलब्ध कराने और लैब के संचालन का पूरा काम एक ही एजेंसी को सौंपा गया था। अब विभाग इस मॉडल को बदल रहा है। नई व्यवस्था के तहत लैब के लिए उपकरण सप्लाई करने और उन्हें स्थापित करने का काम एक एजेंसी करेगी, जबकि लैब के संचालन का जिम्मा किसी दूसरी एजेंसी को दिया जाएगा। काम बंटने से टेंडर प्रक्रिया में कंपनियों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
छोटे निकायों की परेशानी होगी कम
वर्तमान में प्रदेश के सभी 194 नगरीय निकायों के पास पानी की जांच के लिए अपने खुद के संसाधन नहीं हैं। केवल रायपुर नगर निगम के फिल्टर प्लांट, बिलासपुर और कुछ चुनिंदा बड़े निकायों में ही यह सुविधा मौजूद है। बाकी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को पानी के सैंपल जांच के लिए दूसरी जगह भेजने पड़ते हैं। पीएचई की जिला स्तरीय लैब में पानी की जांच होती है, लेकिन आम लोगों के लिए वहां जांच का शुल्क अधिक है और रिपोर्ट आने में भी काफी समय लग जाता है। पांचों संभागों में नई लैब बनने से छोटे निकायों को भी अपने नजदीक सैंपल जांचने की सुविधा मिल जाएगी।
गंदे पानी की शिकायत पर भी होगी जांच
इन नई लैब को नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) से मान्यता दिलाने की योजना है। लैब केवल सरकारी निकायों के लिए काम नहीं करेंगी, बल्कि कोई भी नागरिक अपने घर, स्कूल, अस्पताल या होटल के पानी का सैंपल यहां दे सकेगा। पानी का रंग, स्वाद या गंध अलग लगने पर, या दूषित पानी से बीमारी होने की स्थिति में लैब में जांच कराई जा सकेगी। यहां क्लोरीन, फ्लोरीन, ई-कोलाई और टर्बिडिटी (गंदलापन) जैसे मानकों पर पानी को परखा जाएगा।
जांच रिपोर्ट में यदि पानी तय मानकों पर सही नहीं पाया जाता है, तो संबंधित नगरीय निकाय को व्यवस्था में सुधार करना होगा। निकाय जलस्रोत और सप्लाई प्वाइंट से सैंपल लेकर लैब में भेजेंगे। जिस जलस्रोत, पाइपलाइन या फिल्टर प्लांट का पानी खराब निकलेगा, वहां कार्रवाई की जाएगी। लैब केवल रिपोर्ट देने का माध्यम नहीं रहेंगी, बल्कि यह गुणवत्ता में सुधार का आधार भी
बनेंगी।
