डीन से प्राध्यापक-सह-संचालक पद पर हुआ तबादला, हाई कोर्ट ने लगाई रोक, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से मांगा जवाब

डीन से प्राध्यापक-सह-संचालक पद पर हुआ तबादला, हाई कोर्ट ने लगाई रोक, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से मांगा जवाब

बिलासपुर : शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर में अधिष्ठाता (डीन) के पद पर पदस्थ डॉ. अविनाश मेश्राम के स्थानांतरण पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। शासन ने 3 सितंबर 2026 को जारी आदेश में डॉ. मेश्राम को अंबिकापुर से शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दुर्ग में प्राध्यापक-सह-संचालक के पद पर स्थानांतरित किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस बी डी गुरु की सिंगल बेंच ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य शासन के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

पदोन्नति के बाद बने थे डीन

याचिका के अनुसार डॉ. मेश्राम पहले शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय कोरबा में संचालक-सह-प्राध्यापक के पद पर पदस्थ थे। शासन ने 2 नवंबर 2022 को उन्हें पदोन्नति देते हुए अधिष्ठाता (डीन) के पद पर नियुक्त किया था। इसके बाद 17 अक्टूबर 2024 को उनकी पदस्थापना शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अंबिकापुर में अधिष्ठाता के पद पर की गई।

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दो साल भी पूरे नहीं हुए और कर दिया निम्न पद पर तबादला

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शासन के 3 सितंबर 2026 के आदेश में डॉ. मेश्राम को अंबिकापुर से दुर्ग भेजते हुए प्राध्यापक-सह-संचालक के पद पर पदस्थ किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से इस स्थानांतरण को चुनौती देते हुए कहा गया कि अंबिकापुर में उनकी पदस्थापना को अभी दो वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं। डॉ. मेश्राम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता अपूर्वा पांडे ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता का मूल पद अधिष्ठाता (डीन) है, जबकि तबादले के बाद उन्हें प्राध्यापक-सह-संचालक के पद पर भेजा गया है। याचिका में इसे डीन के पद से निम्न पद बताया गया है।

जूनियर अधिकारी को अंबिकापुर में दिया डीन का पद

याचिका में यह भी कहा गया कि अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में डॉ. मेश्राम के स्थान पर डॉ. आर सी आर्या की पदस्थापना की गई है, जो याचिकाकर्ता से जूनियर हैं। इन बिंदुओं के आधार पर स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी गई।

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने 3 सितंबर को जारी स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। कोर्ट ने सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, अवर सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा संचालक, चिकित्सा शिक्षा को नोटिस जारी कर मामले में जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

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