रायपुर में जल्द लागू होगी कमिश्नर प्रणाली , थानेदार से लेकर बड़े साहबों तक को मिलेंगी मजिस्ट्रेट वाली शक्तियां 

रायपुर में जल्द लागू होगी कमिश्नर प्रणाली , थानेदार से लेकर बड़े साहबों तक को मिलेंगी मजिस्ट्रेट वाली शक्तियां 

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अब कानून व्यवस्था का चेहरा पूरी तरह बदलने वाला है। मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बड़ा ऐलान करते हुए प्रदेश में पहली बार पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की घोषणा की है। इस नए सिस्टम के आने के बाद अब पुलिस को लाठी चलाने से लेकर जेल भेजने तक के लिए कलेक्टर के आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब एडीजी या आईजी रैंक के बड़े अफसर सीधे शहर की कमान संभालेंगे और उनके पास मजिस्ट्रेट वाली ताकत होगी। सरकार का मानना है कि बढ़ते अपराधों पर लगाम कसने के लिए पुलिस को यह पावर देना जरूरी हो गया था। अगले तीन महीनों में इस नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने की तैयारी है।

कलेक्टर की फाइलों का चक्कर खत्म: अब खुद फैसला लेंगे पुलिस कमिश्नर

अभी तक शहर में धारा 144 लगाने, लाठीचार्ज करने या किसी जुलूस की अनुमति के लिए पुलिस को कलेक्टर के पास फाइल भेजनी पड़ती थी। नई व्यवस्था लागू होते ही पुलिस कमिश्नर खुद ये फैसले ले सकेंगे। गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब विभाग जल्द ही इसका नोटिफिकेशन जारी करेगा। रायपुर के करीब 20 शहरी थाने इस सिस्टम के दायरे में आएंगे, जबकि ग्रामीण इलाकों को इससे बाहर रखा जाएगा। रायपुर के बाद इस मॉडल को बिलासपुर और दुर्ग भिलाई में भी लागू करने की योजना है।

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क्या-क्या बदल जाएगा आपके शहर में?

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  • कमिश्नर प्रणाली आने के बाद पुलिस के पास वो अधिकार आ जाएंगे जो अब तक राजस्व विभाग के पास थे।
  •  धरना प्रदर्शन की परमिशन: रैली या जुलूस के लिए अब कलेक्ट्रेट जाने की जरूरत नहीं होगी।
  •   गुंडा एक्ट और जिला बदर: किसी बदमाश को शहर से बाहर निकालने का फैसला अब सीधे कमिश्नर करेंगे।
  •  हथियारों का लाइसेंस: बंदूक का लाइसेंस जारी करना या उसे रद्द करना अब पुलिस के हाथ में होगा।
  •   होटल और बार पर लगाम: शहर के क्लब, बार और होटलों के समय और संचालन पर पुलिस का सीधा कंट्रोल रहेगा।

पड़ोसी राज्यों से ली गई सीख

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस सिस्टम को लागू करने से पहले मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर मॉडल का बारीकी से अध्ययन किया है। साल 2022 में ही अफसरों की एक टीम वहां भेजी गई थी ताकि समझा जा सके कि कलेक्टर और पुलिस के बीच अधिकारों को लेकर कोई टकराव तो नहीं होता। प्रमोद साहू ने बताया कि रायपुर की बढ़ती आबादी और अपराध के ग्राफ को देखते हुए लंबे समय से इस बदलाव की मांग की जा रही थी। अब पुलिस के पास पावर तो होगी, लेकिन जनता की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं कि क्या इससे वाकई सड़क पर गुंडागर्दी कम होगी।

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