त्विषा शर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'बेटी की मौत से बेहतर तलाक', निष्पक्ष जांच पर जोर, CBI जांच के संकेत

त्विषा शर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'बेटी की मौत से बेहतर तलाक', निष्पक्ष जांच पर जोर, CBI जांच के संकेत

नई दिल्ली। मॉडल और एक्टर त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर कानूनी और सामाजिक बहस छेड़ दी है। शादी के महज पांच महीने बाद ससुराल में फंदे से लटकी मिली त्विषा की मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई करते हुए शुरुआती जांच प्रक्रिया पर गहरी चिंता जाहिर की है। अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी संस्थागत प्रभाव वाली जांच बेहद जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच अनिवार्य है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा दूसरे पोस्टमॉर्टम के आदेश की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जल्द और निष्पक्ष मेडिकल जांच बेहद अहम होती है। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया कवरेज को लेकर भी सख्त टिप्पणी की और कहा कि पीड़ित परिवार के दुख को ‘टीवी साउंड बाइट्स’ तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने संभावित गवाहों, आरोपियों और उनके परिवारों को मीडिया में बयानबाजी से दूर रहने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि से बचना जरूरी है। आरोपी पक्ष की ओर से भी यह आश्वासन दिया गया कि जांच से जुड़े किसी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक बयान नहीं दिए जाएंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि संवेदनशील मामलों में सार्वजनिक बयानबाजी न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

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मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में भावुक टिप्पणी करते हुए कहा कि “बेटी की मौत से बेहतर है कि उसका तलाक हो जाए।” उनकी यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान चर्चा का केंद्र बन गई। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार जल्द ही मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने पर फैसला लेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और कानूनसम्मत होनी चाहिए।

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त्विषा शर्मा मौत मामला अब केवल एक पारिवारिक त्रासदी नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, वैवाहिक उत्पीड़न और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद इस केस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। अदालत ने फिलहाल स्वतः संज्ञान याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित पक्षों को आगे उचित कानूनी मंच पर जाने की स्वतंत्रता दे दी है।

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