Covid के बाद युवाओं में बढ़ी Hip Replacement Surgery, 30-40 की उम्र में तेजी से बढ़ रहे AVN के मामले

Covid के बाद युवाओं में बढ़ी Hip Replacement Surgery, 30-40 की उम्र में तेजी से बढ़ रहे AVN के मामले

Avascular necrosis और हिप से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामले अब युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले कूल्हे की समस्या को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 30 से 40 साल की उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, देश में Hip replacement सर्जरी के मामलों में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 महामारी के बाद यह समस्या तेजी से बढ़ी है। खासतौर पर स्टेरॉयड के ज्यादा इस्तेमाल और समय पर जांच न होने की वजह से युवाओं में कूल्हे के जोड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

क्या है एवास्कुलर नेक्रोसिस (AVN)?
एवास्कुलर नेक्रोसिस ऐसी स्थिति है, जिसमें कूल्हे की हड्डी तक पर्याप्त ब्लड सप्लाई नहीं पहुंच पाती। इसके कारण हड्डियों के ऊतक धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं।

  • यह बीमारी लगातार दर्द पैदा करती है
  • चलने-फिरने में परेशानी बढ़ाती है
  • धीरे-धीरे कूल्हे के जोड़ को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर सकती है

विशेषज्ञों के मुताबिक, अब यह समस्या युवाओं और मध्यम आयु वर्ग में तेजी से देखने को मिल रही है।

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कोविड के बाद क्यों बढ़े मामले?
डॉक्टरों का कहना है कि कोविड के दौरान स्टेरॉयड कई मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हुए, लेकिन कुछ मामलों में इनके लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से हड्डियों को नुकसान पहुंचा।

इसके कारण:

  • ऑस्टियोनेक्रोसिस का खतरा बढ़ा
  • फीमर हेड को नुकसान पहुंचा
  • गंभीर गठिया और हिप डैमेज के मामले सामने आए

अब डॉक्टरों के पास कम उम्र के ऐसे मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, जिन्हें जल्दी हिप सर्जरी की जरूरत पड़ रही है।

देरी से जांच बन रही बड़ी वजह
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कई लोग शुरुआती दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी धीरे-धीरे गंभीर होती जाती है।

अगर समय पर जांच न हो तो

  • कूल्हे का जोड़ पूरी तरह खराब हो सकता है
  • सामान्य चलना-फिरना मुश्किल हो सकता है
  • अंत में Hip Replacement Surgery की जरूरत पड़ सकती है

शुरुआती पहचान क्यों है जरूरी?
डॉक्टरों के मुताबिक, अगर AVN का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए तो कई मामलों में सर्जरी से पहले ही इलाज संभव हो सकता है।

  • समय रहते इलाज से जोड़ों को सुरक्षित रखा जा सकता है
  • बीमारी की रफ्तार कम की जा सकती है
  • सर्जरी की जरूरत टाली जा सकती है

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कूल्हे में दर्द, चलने में परेशानी या अकड़न महसूस होने पर तुरंत ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

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