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रिटायर साहब को मलाईदार कुर्सी दिलाने दलालों ने मंत्रालय में डाला डेरा, क्या संविदा के भरोसे चलेगा जल संसाधन विभाग?
रायपुर। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में इन दिनों अजीब खेल चल रहा है। विभाग के मुखिया के तौर पर रिटायर हो चुके इंद्रजीत उईके को फिर से संविदा नियुक्ति दिलाने के लिए प्रशासनिक दलालों का एक खेमा राज्य के मंत्रालय से लेकर विभाग मुख्यालय तक सक्रिय हो गया है। सरकार इस मामले में फैसला लेने में जितनी देरी कर रही है दलालों का हौसला उतना ही बढ़ रहा है। चर्चा है कि एक खास ग्रुप चाहता है कि उईके ही विभाग की कमान संभालें ताकि पुराने घोटालों और फाइल दबाने का काम आसानी से हो सके। सरकार की इस चुप्पी ने विभाग के उन काबिल अधिकारियों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है जो सालों से अपनी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।
सोचने वाली बात तो यह है कि ईएनसी के खिलाफ कोर्ट की शरण लेने वाले करीब 60 अधिकारियों में से एक जेआर भगत को कथित तौर पर प्रलोभन देकर याचिका वापस करा ली गई है। सूत्रों के मुताबिक भगत को रिटायरमेंट के बाद संविदा नियुक्ति देने का वादा किया गया है। जिस अधिकारी को विभाग ने पदोन्नति के लायक नहीं समझा अब उसी को संविदा पर रखने के लिए फाइलें जेडी स्तर तक दौड़ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या विभाग अब नियमों से नहीं बल्कि दलालों की सेटिंग से चलेगा।
प्रमोशन रोककर संविदा बांटने की तैयारी
जल संसाधन विभाग में खाली पदों को भरने और पात्र अधिकारियों को प्रमोशन देने की जगह रिटायर लोगों को वापस लाने की तैयारी सरकार की मंशा पर सवाल उठाती है। सूत्र बताते है कि अगर समय पर प्रमोशन होता तो जेआर भगत जैसे वरिष्ठ अफसर खुद ईएनसी की पात्रता रखते। लेकिन उन्हें दरकिनार कर अब संविदा का झुनझुना पकड़ाया जा रहा है। सरकार की ढुलमुल रवैए के कारण ही दलाल मंत्रालय में हावी हैं और अधिकारियों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।
पुराने दाग धोने के लिए हो रही है सेटिंग
जानकारों का मानना है कि विभाग में हुए पुराने कथित भ्रष्टाचार और आपराधिक मामलों को दबाने के लिए ही पसंदीदा चेहरों को दोबारा कुर्सी पर बैठाने की जिद की जा रही है। विभागीय गलियारों में यह चर्चा आम है कि यदि कोई नया और निष्पक्ष अधिकारी मुखिया बना तो कई बड़ी फाइलें खुल सकती हैं। यही वजह है कि दलालों का गिरोह रात-दिन एक कर उईके की वापसी के रास्ते बना रहा है।
विभाग का कामकाज ठप पड़ा है जिसका सीधा नुकसान राज्य की सिंचाई योजनाओं को हो रहा है।सरकार की यह लेट-लतीफी और विभाग में बढ़ता दलालों का रसूख साफ बता रहा है कि पारदर्शी प्रशासन के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। अगर समय रहते संविदा के इस खेल को नहीं रोका गया तो जल संसाधन विभाग गुटबाजी का अखाड़ा बनकर रह जाएगा।
लेखक के विषय में
मणिशंकर पांडेय National Jagat Vision के संस्थापक, मालिक एवं मुख्य संपादक हैं। वे निष्पक्ष, सटीक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य देश-दुनिया की सच्ची और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुँचाना है।
