छत्तीसगढ़ के छात्रों के साथ 'बड़ा धोखा': मेडिकल पीजी की 75% सीटें अब बाहरी लोगों के लिए खुलीं, राज्य के युवा हताश!

छत्तीसगढ़ के छात्रों के साथ 'बड़ा धोखा': मेडिकल पीजी की 75% सीटें अब बाहरी लोगों के लिए खुलीं, राज्य के युवा हताश!

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों के लिए एक बुरी खबर है। राज्य की नई नीति के कारण पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों पर अब स्थानीय छात्रों का हक कम हो जाएगा। सीटों का कुल 75 फीसदी हिस्सा अब ऑल इंडिया ओपन कोटे में शामिल कर दिया गया है। यानी, दूसरे राज्यों के या बाहर से पढ़कर आए विद्यार्थी अब इन सीटों पर दाखिला ले सकेंगे। छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए केवल 25 फीसदी सीटें ही बची हैं।

आंकड़ों के हिसाब से देखें तो राज्य की कुल 405 पीजी मेडिकल सीटों में से अब 303 सीटें बाहरी छात्रों को मिलेंगी। छत्तीसगढ़ के अपने मेडिकल छात्रों को केवल 102 सीटों से ही संतोष करना पड़ेगा। इस अचानक और बड़े बदलाव से स्थानीय छात्रों में भारी गुस्सा है।

डॉक्टरों की कमी का खतरा!

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छात्रों का कहना है कि यह फैसला राज्य के लिए बहुत नुकसानदायक है। पीजी की पढ़ाई के बाद डॉक्टरों को दो साल की बॉन्ड पोस्टिंग करनी होती है, जिसका मतलब है कि उन्हें ग्रामीण या सरकारी अस्पतालों में सेवा देनी होती है। छात्रों का डर है कि ऑल इंडिया कोटे से आने वाले 75 फीसदी डॉक्टर बॉन्ड पूरा किए बिना ही अपने राज्य वापस लौट जाएंगे और छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं में डॉक्टरों की भारी कमी हो जाएगी। छात्र अब इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

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कोर्ट का निर्देश कुछ और था, फैसला कुछ और

डॉक्टर हीरा सिंह लोधी ने बताया कि कोर्ट ने उन्हें केवल '11क' हटाने का निर्देश दिया था। लेकिन अधिकारियों ने 50 फीसदी ओपन कोटे को बढ़ाकर 75 फीसदी कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि इससे स्थानीय छात्रों को सीधे-सीधे नुकसान होगा। पुराने आंकड़ों के मुताबिक भी ओपन कोटे से पढ़ाई करने वाले ज्यादातर डॉक्टर पढ़ाई पूरी होते ही अपने गृह राज्यों में लौट जाते हैं।

पहले ही थी डॉक्टरों की भारी कमी

राज्य के 11 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहले से ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। मेकाहारा और डीकेएस जैसे बड़े अस्पतालों में भी सुपर स्पेश्यालिटी डॉक्टर नहीं हैं। नई नीति से यह संकट और भी गहरा सकता है।

प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में सीटों का हाल (कुल सीटें)

  1.  केएनएम रायपुर: 74
  2.  सिम्स: 42
  3.  जगदलपुर: 15
  4.  अंबिकापुर: 23
  5.  रायगढ़: 15
  6.   कोरबा: 07
  7.   रिम्स: 54
  8.   शंकराचार्य: 86
  9.  बालाजी: 82
  10.   राजनांदगांव: 07
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