डिजिटल इंडिया की मार : बिना मोबाइल और ओटीपी के चक्कर में फंसे 20 हजार किसान नहीं बेच पाएंगे धान

डिजिटल इंडिया की मार : बिना मोबाइल और ओटीपी के चक्कर में फंसे 20 हजार किसान नहीं बेच पाएंगे धान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस साल धान की फसल तो बंपर हुई है लेकिन हजारों किसानों की किस्मत एग्रीस्टेक पोर्टल के मकड़जाल में उलझ कर रह गई है। सरकार ने इस बार समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए इस नए पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य कर दिया है। विडंबना देखिए कि रायपुर जिले के ही 20 हजार से ज्यादा किसान अब तक इस सिस्टम में अपना नाम दर्ज नहीं करा पाए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि कई गरीब किसानों के पास आज भी अपना मोबाइल नहीं है। अब पोर्टल पर नाम नहीं होने से सिस्टम उनकी जमीन का रिकॉर्ड ही नहीं दिखा रहा है जिससे समितियों ने धान खरीदने से हाथ खड़े कर दिए हैं।

बिना पंजीयन नहीं बिकेगा 21 क्विंटल धान

शासन ने इस बार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदने का वादा किया है और भाव भी 3100 रुपए प्रति क्विंटल तय है। लेकिन प्रशासनिक सख्ती और तकनीकी अड़चनों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जब तक एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसान का डेटा नहीं चढ़ेगा तब तक वह सरकारी खरीदी केंद्र पर एक दाना भी नहीं बेच पाएगा। जानकारों का कहना है कि अगर इन 20 हजार किसानों की समस्या जल्द दूर नहीं हुई तो हजारों टन धान खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बिकने को मजबूर होगा।

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सर्वर और ओटीपी ने बढ़ाई किसानों की बेचैनी

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मैदानी इलाकों से आ रही खबरें बताती हैं कि पंजीयन के दौरान किसानों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। दतरेंगा के रहने वाले किसान जीवन लाल ने बताया कि पोर्टल पर एंट्री करते समय कभी सर्वर डाउन रहता था तो कभी घंटों इंतजार के बाद भी मोबाइल पर ओटीपी नहीं आता था। कई बुजुर्ग किसानों के पास मोबाइल ही नहीं है और जिनके पास है उनका नंबर आधार से लिंक नहीं है। ऐसी छोटी-छोटी तकनीकी खामियों ने अन्नदाता के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

सरकारी सिस्टम का गणित और जमीनी हकीकत

रायपुर जिले के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी चिंताजनक है। जिले के कुल पंजीकृत किसानों में से एक बड़ा हिस्सा पोर्टल की अनिवार्य शर्त के कारण बाहर बैठा है। प्रशासन ने सुविधा के दावे तो बहुत किए लेकिन ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की सुस्त रफ्तार और मोबाइल की कमी का कोई तोड़ नहीं निकाला गया। अब फसल कटकर खलिहानों में तैयार खड़ी है लेकिन  पोर्टल की हरी झंडी न मिलने से किसान बेचैन हैं।

साहब के भरोसे किसान और दांव पर भविष्य

पंजीयन न होने से किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि सरकार को मोबाइल और ओटीपी जैसी शर्तों में ढील देनी चाहिए ताकि वास्तविक किसान अपनी मेहनत की कमाई बेच सके। अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासनिक अमले की होगी।

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